Dubai की तरक्की को गुब्बारा बताने वाले थे गलत, 2008 के संकट के बाद ऐसे वापसी की अर्थव्यवस्था
World: साल 2004 के एक वीडियो में दुबई के शासक Sheikh Mohammed bin Rashid Al Maktoum ने उन लोगों की बात की थी जो दुबई की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को एक ‘गुब्बारा’ मानते थे। उनका मानना था कि कुछ लोग इस विकास
World: साल 2004 के एक वीडियो में दुबई के शासक Sheikh Mohammed bin Rashid Al Maktoum ने उन लोगों की बात की थी जो दुबई की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को एक ‘गुब्बारा’ मानते थे। उनका मानना था कि कुछ लोग इस विकास को अस्थाई मान रहे थे और उम्मीद कर रहे थे कि यह जल्द ही फूट जाएगा। उस समय दुबई की जीडीपी 16.7% की रफ्तार से बढ़ रही थी और गैर-तेल क्षेत्रों में काफी निवेश हो रहा था।
साल 2004 को दुबई की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गोल्डन ईयर’ कहा गया क्योंकि इसी दौरान Dubai International Financial Centre (DIFC) की स्थापना हुई। इससे दुबई एक ग्लोबल फाइनेंशियल हब बन गया। लेकिन 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने दुबई को बुरी तरह प्रभावित किया। 2007 से 2008 के बीच प्रॉपर्टी की कीमतें करीब 59% तक बढ़ गई थीं, जिसके बाद 2009 की पहली तीन महीनों में रिहायशी मकानों की कीमतें 40 से 50% तक गिर गईं। इस दौरान कई प्रोजेक्ट्स रद्द हुए और सरकारी कंपनियों पर कर्ज का बोझ बढ़ गया।
इस संकट से उबरने के लिए दुबई ने कई बड़े कदम उठाए और अर्थव्यवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों में फैलाया। रिकवरी के लिए किए गए मुख्य प्रयास इस प्रकार रहे:
| संस्था/व्यक्ति | की गई कार्रवाई |
|---|---|
| Abu Dhabi सरकार | दुबई को 20 बिलियन डॉलर की वित्तीय मदद दी |
| Sheikh Mohammed | कर्ज चुकाने और विकास प्रोजेक्ट्स को जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई |
| UAE सेंट्रल बैंक | बैंकिंग सेक्टर में 33 बिलियन डॉलर डाले और क्रेडिट नियम कड़े किए |
2008 के बाद दुबई ने केवल तेल पर निर्भरता कम की और ट्रेड, टूरिज्म, फाइनेंस, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी पर ध्यान दिया। साल 2011 तक आर्थिक विकास वापस लौटा और 2012 से रियल एस्टेट मार्केट में सुधार दिखने लगा। Expo 2020 जैसे आयोजनों ने इस ग्रोथ को और रफ्तार दी।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी 2021 से 2025 तक प्रॉपर्टी की औसत कीमतें लगभग 75% बढ़ी हैं। अप्रैल 2026 में Sheikh Mohammed ने कहा कि UAE निवेशकों और कुशल कर्मचारियों के लिए एक लंबी अवधि का भरोसेमंद विकल्प है। आज UAE दुनिया के टॉप 10 निर्यातकों में शामिल है और अब टिकाऊ विकास और रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहा है।