Donald Trump की सऊदी अरब को शर्त, इजरायल से संबंध सुधारें तभी मिलेगी परमाणु डील की मंजूरी

World : अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए परमाणु समझौते पर अब एक बड़ा मोड़ आ गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कह दिया है कि सऊदी अरब को इजरायल के साथ औपचारिक संबंध बनाने होंगे, तभी इस डील को आगे बढ़ाया ज

World : अमेरिका और सऊदी अरब के बीच हुए परमाणु समझौते पर अब एक बड़ा मोड़ आ गया है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने साफ कह दिया है कि सऊदी अरब को इजरायल के साथ औपचारिक संबंध बनाने होंगे, तभी इस डील को आगे बढ़ाया जाएगा। यह शर्त उन्होंने ‘अब्राहम अकॉर्ड्स’ (Abraham Accords) के तहत सऊदी अरब को शामिल होने के लिए रखी है।

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के ऊर्जा विभाग और सऊदी ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान ने बुधवार, 22 जुलाई 2026 को एक शांतिपूर्ण परमाणु सहयोग समझौते (123 Agreement) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके ठीक अगले दिन, 23 जुलाई को Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर यह शर्त रखी। उन्होंने कहा कि यह सिविल न्यूक्लियर डील पूरी तरह से इस बात पर निर्भर है कि सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स का हिस्सा बनता है या नहीं।

इस समझौते की कुछ मुख्य बातें इस प्रकार हैं कि यह डील केवल गैर-सैन्य उपयोग के लिए होगी और इसमें किसी भी तरह की सामग्री के संवर्धन (enrichment) की अनुमति नहीं होगी। यह समझौता 30 साल के लिए होगा और इसके विकास में अमेरिकी कंपनियों की भूमिका रहेगी। अब इस समझौते के टेक्स्ट को अमेरिकी कांग्रेस के पास 90 दिनों की समीक्षा के लिए भेजा जाएगा।

इस खबर पर इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि अगर सऊदी अरब अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होता है, तो यह मध्य पूर्व में शांति की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा। वहीं, वाशिंगटन में सऊदी दूतावास ने ट्रंप की इस नई शर्त पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

दूसरी तरफ, परमाणु विशेषज्ञों ने इस डील को लेकर चिंता जताई है। कुछ जानकारों का मानना है कि इस समझौते में पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हो सकते हैं, जिससे भविष्य में सऊदी अरब यूरेनियम संवर्धन की कोशिश कर सकता है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने बताया कि यह समझौता अमेरिकी कंपनियों के साथ काम करने की गारंटी देता है और इसे कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी।