DLF, Hiranandani और Brigade ने बनाए ‘मिनी रिपब्लिक’, सरकारी सुविधाओं की कमी के कारण लोग चुन रहे गेटेड टाउनशिप

Finance: भारत के बड़े शहरों में DLF, Hiranandani और Brigade जैसे बिल्डर्स ने ऐसी गेटेड टाउनशिप बनाई हैं जो किसी छोटे देश या ‘मिनी रिपब्लिक’ की तरह काम करती हैं। लोग इन महंगी सोसायटियों में इसलिए जा रहे हैं क्

Finance: भारत के बड़े शहरों में DLF, Hiranandani और Brigade जैसे बिल्डर्स ने ऐसी गेटेड टाउनशिप बनाई हैं जो किसी छोटे देश या ‘मिनी रिपब्लिक’ की तरह काम करती हैं। लोग इन महंगी सोसायटियों में इसलिए जा रहे हैं क्योंकि शहर की सरकारी बुनियादी सुविधाएं जैसे सड़क, नाली और बिजली का सिस्टम फेल हो चुका है। अब लोग शहर के बीच रहने के बजाय इन टाउनशिप में रहना ज्यादा सुरक्षित और आसान मान रहे हैं।

इन टाउनशिप के अंदर रहने वालों को शहर की उन समस्याओं से नहीं जूझना पड़ता जो आम जनता झेलती है। जैसे कि सड़कों पर पानी भरना, खराब ड्रेनेज और खुले तारों से करंट लगने का खतरा। इन सोसायटियों के अंदर अपनी सड़कें, कचरा प्रबंधन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट होते हैं। यहाँ तक कि रहने वालों को बाहर जाने की जरूरत कम पड़ती है क्योंकि अंदर ही सुपरमार्केट, बैंक, अस्पताल, जिम और रेस्टोरेंट जैसी सारी सुविधाएं मिल जाती हैं।

इन समुदायों का अपना एक अलग शासन सिस्टम होता है। यहाँ रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) या बिल्डर की टीम काम करती है। लोग अपनी मैनेजिंग कमेटी चुनते हैं, बजट पर चर्चा करते हैं और सुरक्षा से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक के फैसले खुद लेते हैं। इन सोसायटियों के अपने कड़े नियम होते हैं, जैसे मेंटेनेंस चार्ज देना, पालतू जानवरों के नियम और मेहमानों के आने-जाने का तरीका।

डेवलपर प्रमुख प्रोजेक्ट्स शहर
DLF DLF Camellias Gurugram
Hiranandani Hiranandani Gardens, Hiranandani Estate, Fortune City Powai, Thane, Panvel
Brigade Brigade Utopia Bengaluru

इस ट्रेंड पर अलग-अलग राय सामने आई है। पवई के निवासी अमितेश शेट्टी का कहना है कि वे अब मुंबई के पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर कम निर्भर हैं। वहीं, उबैद सिद्दीकी जैसे रिसर्चर्स का मानना है कि ऐसी सोसायटियां समाज में अमीरी-गरीबी की खाई को और बढ़ाती हैं क्योंकि यहाँ सिर्फ अमीर लोग ही रह पाते हैं। तेलंगाना हाई कोर्ट ने भी जनवरी 2025 में हैदराबाद पुलिस को निर्देश दिया था कि इन गेटेड कम्युनिटीज के मैनेजमेंट के लिए सही गाइडलाइंस बनाई जाएं क्योंकि इनके लिए कोई अलग कानून नहीं है।

एसेट्ज़ प्रॉपर्टी ग्रुप के सुनील कुमार पारीक का कहना है कि किसी भी टाउनशिप का पूरी तरह आत्मनिर्भर होना व्यावहारिक नहीं है। उनका मानना है कि इन प्रोजेक्ट्स का मकसद सिर्फ यात्रा कम करना होना चाहिए, न कि शहर से पूरी तरह कट जाना।