Delhi Zoo में अब मशीनें पालेंगी घड़ियाल के बच्चे, अंडों की देखभाल के लिए आई नई तकनीक
Delhi: राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (Delhi Zoo) में घड़ियालों के संरक्षण के लिए एक नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है। अब घड़ियाल के अंडों की देखभाल उनकी मां के बजाय मशीनें करेंगी। जून 2026 के अपडेट के मुताबिक, च
Delhi: राष्ट्रीय प्राणी उद्यान (Delhi Zoo) में घड़ियालों के संरक्षण के लिए एक नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया गया है। अब घड़ियाल के अंडों की देखभाल उनकी मां के बजाय मशीनें करेंगी। जून 2026 के अपडेट के मुताबिक, चिड़ियाघर ने बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इनक्यूबेशन तकनीक अपनाई है ताकि इस लुप्तप्राय प्रजाति की संख्या बढ़ाई जा सके।
चिड़ियाघर के अधिकारियों ने बताया कि घड़ियालों के मामले में मादाएं खुद अपने अंडों को सेती नहीं हैं। इसलिए अंडों को सावधानी से हटाकर एक वैज्ञानिक सिस्टम में रखा गया है, जहां तापमान और नमी पर लगातार नजर रखी जाती है। यह तरीका इसलिए जरूरी है क्योंकि घड़ियालों का प्रजनन पिछले कुछ सालों में सफल नहीं रहा है। आखिरी बार 2010-11 में 11 बच्चे पैदा हुए थे, लेकिन वे कुछ ही दिनों में मर गए थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, अंडों के विकास और उनके लिंग (नर या मादा) का निर्धारण तापमान पर निर्भर करता है। ज्यादा तापमान होने पर मादा और कम तापमान होने पर नर बच्चे पैदा होने की संभावना रहती है। इसके अलावा, नर घड़ियाल कभी-कभी अंडों को नष्ट कर देते हैं या नए जन्मे बच्चों को नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए अंडों को सुरक्षित जगह पर शिफ्ट करना जरूरी हो गया है।
अधिकारियों ने यह भी कहा कि अंडों को हटाने से मादा घड़ियाल एक ही ब्रीडिंग सीजन में ज्यादा अंडे दे सकती हैं। फिलहाल दिल्ली चिड़ियाघर में सिर्फ तीन घड़ियाल बचे हैं, इसलिए इस प्रोग्राम को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आने वाले करीब 45 दिनों में इस नई तकनीक के नतीजों का पता चलेगा।