Delhi में सिमट रही है यमुना, 68 प्रतिशत कम हुई चौड़ाई; स्टडी में सामने आई चिंताजनक स्थिति
Delhi: राजधानी की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी अब धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी और IISER भोपाल के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी की है जिसमें बताया गया है कि बेतरतीब शहरीकरण की वजह से नदी की हालत बहुत खरा
Delhi: राजधानी की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी अब धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है। दिल्ली यूनिवर्सिटी और IISER भोपाल के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी की है जिसमें बताया गया है कि बेतरतीब शहरीकरण की वजह से नदी की हालत बहुत खराब हो गई है। नदी अब इतनी संकरी हो चुकी है कि भारी बारिश या बाढ़ को झेलने की उसकी प्राकृतिक क्षमता लगभग खत्म हो गई है।
इस रिसर्च के मुताबिक, साल 1799 में यमुना की औसत चौड़ाई करीब 658 मीटर थी, जो 2024 तक घटकर सिर्फ 210 मीटर रह गई है। इसका मतलब है कि नदी 68 प्रतिशत तक सिमट गई है। सिर्फ चौड़ाई ही नहीं, बल्कि पानी के बहाव में भी भारी गिरावट आई है। 1799 में जहाँ बहाव 30,000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड था, वह 2024 में घटकर मात्र 3,900 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड रह गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बैराज, तटबंध, नहरों और तेजी से बढ़ते शहरों ने नदी का दम घोंट दिया है। मानसून के समय भी हथिनीकुंड बैराज से ज्यादातर पानी नहरों में मोड़ दिया जाता है, जिससे नदी में बहुत कम पानी बचता है। SANDRP की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में भी नदी में पानी का स्तर बहुत कम रखा गया, जो आमतौर पर गर्मियों के लिए होता है। इससे नदी में गंदगी साफ करने और जमीन के पानी को रिचार्ज करने की क्षमता कम हो गई है।
नदी की इस हालत पर सरकार ने भी अपनी योजनाएं बताई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 15 जुलाई 2026 को कहा कि दिसंबर 2028 तक यमुना में एक बूंद भी गंदा पानी नहीं बहेगा। इसके लिए दिल्ली में 80 ट्रीटमेंट प्लांट पर काम शुरू हो चुका है। वहीं, CPCB ने नोएडा अथॉरिटी, खोड़ा नगर पालिका परिषद और दिल्ली जल बोर्ड जैसे दस निकायों को नदी प्रदूषित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया है।
सिल्ट जमा होने और नदी के किनारों पर अवैध कब्जों की वजह से अब कम पानी आने पर भी दिल्ली में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। संसदीय समिति की एक रिपोर्ट में तो यहाँ तक कहा गया कि साल के 12 महीनों में से 9 महीने यमुना दिल्ली में लगभग गायब रहती है।