Delhi की यमुना नदी ‘जैविक रूप से मृत’, गंदगी तय सीमा से 130 गुना ज्यादा; DPCC की रिपोर्ट में खुलासा
Delhi: राजधानी की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी की हालत बेहद खराब है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना अब ‘जैविक रूप से मृत’ हो चुकी है। नदी के कई हिस्सों में ऑक्सीजन
Delhi: राजधानी की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी की हालत बेहद खराब है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, यमुना अब ‘जैविक रूप से मृत’ हो चुकी है। नदी के कई हिस्सों में ऑक्सीजन की मात्रा शून्य हो गई है, जिसका मतलब है कि अब इसमें मछलियां या अन्य जलीय जीव जीवित नहीं रह सकते।
जुलाई 2026 में जारी रिपोर्ट में मई 2025 और मई 2026 के आंकड़ों की तुलना की गई है। रिपोर्ट बताती है कि नदी में मल-मूत्र का प्रदूषण तय सीमा से 130 गुना ज्यादा बढ़ गया है। उदाहरण के लिए, असगरपुर इलाके में फेकल कोलीफॉर्म का स्तर 3,30,000 MPN प्रति 100 मिलीलीटर पाया गया, जबकि इसकी अधिकतम सीमा सिर्फ 2,500 MPN होनी चाहिए। यह साफ तौर पर बताता है कि शहर का बिना साफ किया हुआ गंदा पानी अब भी सीधे नदी में गिर रहा है।
नदी की घटती हालत पर विशेषज्ञों ने भी चिंता जताई है। Centre for Science and Environment की सुस्मिता सेनगुप्ता ने बताया कि गंदे नालों के पानी और नदी के बहाव में कमी की वजह से प्रदूषण बढ़ रहा है। वहीं, यमुना एक्टिविस्ट भीम सिंह रावत ने कहा कि नदी को बचाने के लिए उसमें पर्याप्त पानी का बहाव होना बहुत जरूरी है।
सरकार इस समस्या को दूर करने के दावे कर रही है। रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को आधुनिक बनाने और नालों को रोकने का वादा किया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी 17 जुलाई 2026 को भरोसा दिलाया कि दिसंबर 2028 तक यमुना में कोई भी बिना साफ किया हुआ पानी नहीं जाएगा।
प्रदूषण रोकने के लिए कुछ नए कदम भी उठाए गए हैं। MCD और National Dairy Development Board के बीच एक समझौता हुआ है, ताकि गोबर से बायो गैस बनाई जा सके और नदी में गंदगी कम हो। दूसरी तरफ, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने 15 जुलाई 2026 को MCD और DPCC को फटकार लगाई है क्योंकि यमुना के किनारों पर चल रही अवैध डेयरी पर अब तक पूरी कार्रवाई नहीं हुई है।
दिल्ली यूनिवर्सिटी और आईआईएसईआर भोपाल के वैज्ञानिकों की एक स्टडी में यह भी सामने आया कि 1799 के मुकाबले यमुना की चौड़ाई 68% कम हो गई है और पानी का बहाव लगभग 90% तक घट गया है। इसका बड़ा कारण शहरी विकास और इंजीनियरिंग के काम बताए गए हैं।