Delhi में यमुना के किनारे चल रहे हैं बुलडोजर, सैकड़ों परिवार हुए बेघर, DDA ने चलाया बड़ा अभियान

Delhi: यमुना के मैदानी इलाकों में बसे अवैध निर्माणों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन शुरू हो गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और MCD की टीमों ने यमुना बाजार और आसपास के इलाकों में भारी बुलडोजर चलाकर कई बस्तियों को हटा दिया

Delhi: यमुना के मैदानी इलाकों में बसे अवैध निर्माणों पर प्रशासन का बड़ा एक्शन शुरू हो गया है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और MCD की टीमों ने यमुना बाजार और आसपास के इलाकों में भारी बुलडोजर चलाकर कई बस्तियों को हटा दिया है। इस कार्रवाई से सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं और इलाके में काफी तनाव का माहौल है।

यह पूरी कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशों के बाद की गई है। कोर्ट ने साफ कहा था कि यमुना के ‘O-Zone’ यानी पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील इलाके में किसी भी तरह का स्थायी निर्माण या रिहायशी बस्ती नहीं हो सकती। दिल्ली मास्टर प्लान 2021 के तहत इस क्षेत्र में रहना पूरी तरह प्रतिबंधित है ताकि बाढ़ के खतरे को कम किया जा सके और नदी के प्राकृतिक बहाव को बचाया जा सके।

जून 2026 के आखिरी हफ्ते में यमुना बाजार इलाके में करीब 300 परिवार बेघर हुए। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें सामान हटाने के लिए दिया गया समय पूरा होने से पहले ही बुलडोजर चला दिया। कई लोगों ने बताया कि उनके घरों की बिजली और पानी की सप्लाई पहले ही काट दी गई थी, जिसके बाद मजबूरी में उन्होंने अपना सामान बचाने के लिए खुद ही अपने घर तोड़ लिए।

इस पूरे मामले में कानूनी स्थिति काफी सख्त है। दिल्ली हाई कोर्ट ने 30 दिसंबर 2025 को आदेश दिया था कि यमुना के किनारों पर कोई भी परिवार नहीं रह सकता, चाहे वह धार्मिक स्थल या कब्रिस्तान ही क्यों न हो। इसके अलावा, 14 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने भी यमुना के किनारे बने एक शिव मंदिर को हटाने के फैसले को सही ठहराया था।

दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने DDA को अतिक्रमण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन अब तकनीक और रियल-टाइम मॉनिटरिंग का इस्तेमाल कर रहा है ताकि दोबारा कब्जा न हो। DDA ने बताया कि अप्रैल 2025 से अब तक करीब 241 एकड़ जमीन वापस ली जा चुकी है और इसके लिए 14 फ्लाइंग स्क्वॉड बनाए गए हैं।

दूसरी तरफ, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पहले कहा था कि पुराने निर्माणों को नहीं हटाया जाएगा, लेकिन कोर्ट के आदेशों के कारण जमीनी स्तर पर तोड़फोड़ जारी है। हालांकि DDA ने कुछ लोगों को दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) के जरिए अस्थायी आश्रय देने की बात कही है, लेकिन प्रभावित लोगों का कहना है कि उन्हें सही ढंग से बसाने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है।