Delhi के यमुना फ्लडप्लेन में फिर लौटे अवैध डेयरी फार्म, DPCC ने DDA को दिए तुरंत हटाने के निर्देश

Delhi: राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के डूब क्षेत्र (फ्लडप्लेन) में एक बार फिर अवैध डेयरी फार्म और मवेशियों के ठिकाने बन रहे हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंपी अपनी रिपोर्ट

Delhi: राजधानी दिल्ली में यमुना नदी के डूब क्षेत्र (फ्लडप्लेन) में एक बार फिर अवैध डेयरी फार्म और मवेशियों के ठिकाने बन रहे हैं। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को सौंपी अपनी रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि की है कि पहले की गई कार्रवाई के बावजूद यहां फिर से अतिक्रमण शुरू हो गया है।

DPCC की टीम ने जून और जुलाई 2026 में निरीक्षण किया था। इस दौरान मयूर विहार फेज-1 और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के पास कई अस्थायी शेल्टर, लकड़ी के खूंटों से बंधे मवेशी, चारा और गोबर के ढेर पाए गए। जांच में यह भी देखा गया कि 50 से 60 गाय और भैंस खुले मैदानों में चर रहे थे और कुछ भैंसें यमुना नदी और हिंडन कट नहर में नहा रही थीं।

इस स्थिति को देखते हुए DPCC ने 2 और 6 जुलाई 2026 को दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को कड़े निर्देश दिए हैं। प्रशासन को आदेश दिया गया है कि अवैध रूप से रखे गए मवेशियों को जब्त किया जाए और वहां बनी अस्थायी झुग्गियों और शेल्टर को तुरंत हटाया जाए। साथ ही, इस पूरी कार्रवाई की रिपोर्ट जल्द से जल्द NGT को भेजने के लिए कहा गया है।

नियमों के मुताबिक, दिल्ली में यमुना फ्लडप्लेन को 2 सितंबर 2000 से पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के तहत संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है, जहां किसी भी तरह के स्थायी निर्माण की मनाही है। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी साफ किया है कि धार्मिक ढांचों के नाम पर भी यहां कोई अतिक्रमण नहीं हो सकता।

DPCC ने डेयरी चलाने वालों को चेतावनी दी है कि वे 15 दिनों के भीतर जरूरी लाइसेंस लें ताकि प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन हो सके। नियमों के अनुसार, 14 जानवरों तक की डेयरी को ‘ग्रीन’ और 15 या उससे ज्यादा जानवरों वाली डेयरी को ‘ऑरेंज’ श्रेणी में रखा गया है।

यह मामला पर्यावरण कार्यकर्ता गौरी मौलेखी की याचिका के बाद NGT की निगरानी में है। हालांकि पिछले साल जुलाई 2025 में रिपोर्ट दी गई थी कि कोई अवैध डेयरी नहीं चल रही है, लेकिन ताजा निरीक्षण ने उन दावों को गलत साबित कर दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को होनी है।