Delhi: दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को साफ करने का काम अब सवालों के घेरे में है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पानी को सही से साफ न
Delhi: दिल्ली की जीवनरेखा कही जाने वाली यमुना नदी को साफ करने का काम अब सवालों के घेरे में है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, शहर के कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) पानी को सही से साफ नहीं कर पा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि जिन प्लांट का काम नदी को साफ रखना है, वहीं से गंदा पानी यमुना में जा रहा है।
STP की रिपोर्ट में क्या कमियां मिलीं?
DPCC की मार्च महीने की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के कुल 37 STP में से 9 प्लांट या तो बंद पड़े हैं या फिर सफाई के तय मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं। इनमें से 7 प्लांट ऐसे हैं जहां पानी में ‘फीकल कोलीफॉर्म’ (मल संबंधी बैक्टीरिया) की मात्रा तय सीमा से कहीं ज्यादा पाई गई। नियम के मुताबिक यह स्तर 230 MPN/100 मिलीलीटर से कम होना चाहिए, लेकिन कई प्लांट में यह सीमा पार कर गई है। इसके अलावा, 2 प्लांट पूरी तरह बंद हैं और उनका काम फिर से शुरू करने की तैयारी चल रही है।
नदी की हालत और सरकारी दावे
जनवरी और फरवरी के मुकाबले मार्च में यमुना के पानी की क्वालिटी और खराब हुई है। एक जांच में यह भी सामने आया कि दिल्ली जल बोर्ड की इंटरसेप्टर सीवेज परियोजना (ISP) केवल 60% सीवेज को ही रोक पाई, बाकी गंदा पानी नदी में बह गया। जल मंत्री परवेश वर्मा ने कहा कि मशीनरी को बेहतर किया जा रहा है और बुनियादी ढांचे को अपग्रेड किया जा रहा है। वहीं, दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों ने फंड की कमी और तकनीकी दिक्कतों को देरी की वजह बताया है।
यमुना सफाई के तय मानक और वर्तमान स्थिति
| पैरामीटर |
तय सीमा (Standard) |
वर्तमान स्थिति/रिपोर्ट |
| फीकल कोलीफॉर्म (STP) |
230 MPN/100 मिलीलीटर |
तय सीमा से कई गुना ज्यादा |
| फीकल कोलीफॉर्म (नदी) |
500 से 2500 MPN/100 मिलीलीटर |
मार्च में स्तर में बढ़ोतरी |
| TSS और BOD |
10 मिलीग्राम/लीटर से कम |
मानकों को पूरा करने में चुनौती |
| कुल STP क्षमता |
37 प्लांट |
9 प्लांट फेल या बंद |