Finance : नई दिल्ली में व्यापार और निवेश कानून केंद्र (CTIL) ने एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के पैनल द्वारा ट्रांसनेशनल सब्सिडी पर दिए गए फैसले के कानूनी असर पर चर्चा हुई। वाणिज्य
Finance : नई दिल्ली में व्यापार और निवेश कानून केंद्र (CTIL) ने एक खास कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (WTO) के पैनल द्वारा ट्रांसनेशनल सब्सिडी पर दिए गए फैसले के कानूनी असर पर चर्चा हुई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इस बैठक की जानकारी साझा की है, जिसमें यह देखा गया कि विदेशी संस्थाओं द्वारा दी गई आर्थिक मदद को सब्सिडी मानकर व्यापार पर क्या असर पड़ता है।
WTO पैनल का फैसला और सब्सिडी विवाद क्या है?
यह पूरा मामला यूरोपीय संघ (EU) और इंडोनेशिया के बीच स्टेनलेस स्टील उत्पादों पर लगे टैक्स और ड्यूटी से जुड़ा है। यूरोपीय संघ का मानना था कि इंडोनेशिया को विदेशी संस्थाओं से मदद मिल रही है, जिसे सब्सिडी माना जाना चाहिए। WTO पैनल ने इस पर गौर किया कि ‘वित्तीय योगदान’ की परिभाषा क्या है और क्या एक देश द्वारा दूसरे देश की सीमा के बाहर दी गई मदद को सब्सिडी मानकर उस पर टैक्स लगाया जा सकता है।
इस चर्चा में कौन-कौन शामिल हुए और क्या बातें हुईं?
इस कार्यक्रम का आयोजन CTIL, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड, SAIELN और ISIL ने मिलकर किया। चर्चा के दौरान इन मुख्य बिंदुओं पर बात हुई:
- यूरोपीय संघ ने इंडोनेशिया को मिलने वाली विदेशी आर्थिक मदद को सब्सिडी माना था।
- WTO पैनल ने कहा कि SCM एग्रीमेंट के तहत ‘वित्तीय योगदान’ की एक तय लिस्ट है।
- इस लिस्ट में सरकार से सरकार को मिलने वाले प्रलोभन (inducement) शामिल नहीं हैं।
- पैनल ने इस बात पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया कि क्या सदस्य देश अपनी सीमा के बाहर दी गई सब्सिडी पर टैक्स लगा सकते हैं।
विवाद में किन देशों का क्या स्टैंड था?
| पक्ष |
शामिल देश |
| यूरोपीय संघ का समर्थन किया |
ऑस्ट्रेलिया, चीनी ताइपे, कनाडा और अमेरिका |
| इंडोनेशिया का समर्थन किया |
अर्जेंटीना, चीन, मिस्र और दक्षिण कोरिया |
| तीसरे पक्ष के रूप में शामिल |
जापान |