Delhi की टीना ने सुनाई कामयाबी की कहानी, Cochlear Implant से मिली सुनने की शक्ति और मिला IIT Bombay में एडमिशन
Delhi: दिल्ली की 22 साल की टीना गर्ग ने अपनी हिम्मत और मेडिकल साइंस की मदद से एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जन्म से सुनने की क्षमता न होने के बावजूद टीना ने न सिर्फ सुनना सीखा, बल्कि अपनी पढ़ाई में भी कमाल कर दिखाया। उन्ह
Delhi: दिल्ली की 22 साल की टीना गर्ग ने अपनी हिम्मत और मेडिकल साइंस की मदद से एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। जन्म से सुनने की क्षमता न होने के बावजूद टीना ने न सिर्फ सुनना सीखा, बल्कि अपनी पढ़ाई में भी कमाल कर दिखाया। उन्होंने IIT Bombay में एडमिशन लिया और अब उन्होंने IIM Bangalore में भी अपनी जगह पक्की कर ली है।
टीना को बचपन में ही गंभीर बहरापन था, जिसके कारण उन्हें बातचीत के लिए दूसरों के होंठ पढ़ने पड़ते थे। उनकी इस मुश्किल को दूर करने के लिए Max Super Speciality Hospital, Dwarka में डॉ. सुमित मृग की देखरेख में उनकी दोनों कानों में Cochlear Implant सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद छह महीने तक उन्होंने रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम में हिस्सा लिया, जिससे उन्हें आवाजें सुनाई देने लगीं और उनका आत्मविश्वास बढ़ा।
टीना की इस यात्रा में उनके माता-पिता राधिका और नीरज गर्ग का पूरा साथ रहा। शुरुआती दौर में उन्हें मदद के लिए चेन्नई के Balavidyalaya स्कूल भेजा गया था। टीना ने अपनी पढ़ाई को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए IIM Calcutta का मौका छोड़ा ताकि वह अपनी सर्जरी और इलाज पूरा कर सकें।
डॉ. सुमित मृग ने बताया कि सुनने की क्षमता न होने से इंसान के आत्मविश्वास और सामाजिक जीवन पर बुरा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि सही समय पर सर्जरी और थेरेपी से बड़ों में भी सुनने की शक्ति वापस लाई जा सकती है।
शिक्षा के क्षेत्र में टीना की यह सफलता RPWD Act 2016 के नियमों के तहत भी संभव हुई, जिसमें दिव्यांग छात्रों के लिए 5% सीटें आरक्षित होती हैं। IIT Bombay ने साल 2022 में PwD Student Cell भी बनाया है ताकि दिव्यांग छात्रों को कैंपस में हर तरह की सुविधा मिल सके। भारत सरकार का RBSK प्रोग्राम भी पांच साल से कम उम्र के बच्चों को मुफ्त Cochlear Implant की सुविधा देता है।