Delhi में रोज 4,659 टन कचरा बिना निस्तारण, यमुना में अब भी गिर रहा बिना उपचार का सीवेज
Delhi: राजधानी दिल्ली में कचरे और सीवेज की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, शहर में हर दिन निकलने वाले कचरे का एक बड़ा हिस्सा बिना ट्रीटमेंट के ही छोड़ दिया जा रहा है, जिसका सीधा असर यमुना नदी की
Delhi: राजधानी दिल्ली में कचरे और सीवेज की समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, शहर में हर दिन निकलने वाले कचरे का एक बड़ा हिस्सा बिना ट्रीटमेंट के ही छोड़ दिया जा रहा है, जिसका सीधा असर यमुना नदी की सेहत पर पड़ रहा है। दिल्ली सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) को अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें इस समस्या को 2028 तक पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
शहर में हर दिन कुल 12,862 टन ठोस कचरा निकलता है, जिसमें से 4,659 टन (करीब 37%) का निस्तारण नहीं हो पाता है। प्लास्टिक कचरे की बात करें तो रोज निकलने वाले 1,155.7 टन प्लास्टिक में से 216.7 टन बिना ट्रीटमेंट के रह जाता है। इसी तरह, दिल्ली में रोज लगभग 3,636 मिलियन लीटर सीवेज पैदा होता है, जिसका एक बड़ा हिस्सा बिना साफ हुए सीधे यमुना में जा रहा है।
यमुना की हालत सुधारने के लिए सरकार ने कई बड़े प्लान बनाए हैं। सीवेज ट्रीटमेंट की क्षमता को 2028 तक बढ़ाकर 1,500 MGD करने की तैयारी है। इसके लिए नए प्लांट लगाए जाएंगे और पुराने प्लांटों को अपग्रेड किया जाएगा। साथ ही, 2026 से 2028 के बीच सभी 1,799 अनधिकृत कॉलोनियों को सीवर नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य है।
कचरे के पहाड़ों को खत्म करने के लिए MCD ने भी काम शुरू किया है। ओखला लैंडफिल को दिसंबर 2026 तक, भलस्वा को दिसंबर 2026 तक और गाजीपुर लैंडफिल को दिसंबर 2027 तक पूरी तरह समतल करने का लक्ष्य है। इसके अलावा नरेला-बवाना और गाजीपुर में नए वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाए जाएंगे ताकि कचरे से बिजली बनाई जा सके।
| लक्ष्य/प्रोजेक्ट | डेडलाइन | विवरण |
|---|---|---|
| सीवेज क्षमता 1,500 MGD | दिसंबर 2028 | नए और अपग्रेड STP प्लांट |
| ओखला लैंडफिल सफाई | दिसंबर 2026 | कचरे के ढेर को खत्म करना |
| भलस्वा लैंडफिल सफाई | दिसंबर 2026 | कचरे के ढेर को खत्म करना |
| गाजीपुर लैंडफिल सफाई | दिसंबर 2027 | कचरे के ढेर को खत्म करना |
| अनधिकृत कॉलोनी सीवर कनेक्शन | 2026-2028 | सभी 1,799 कॉलोनियों को जोड़ना |
| वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट | दिसंबर 2028 | नरेला-बवाना और गाजीपुर में निर्माण |
हालिया रिपोर्टों के अनुसार, यमुना विहार और वसंत कुंज समेत सात STP प्लांट तय मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं, जिससे नदी में गंदगी बढ़ रही है। जुलाई की भारी बारिश के बाद भी ओखला के पास नदी में जहरीला झाग देखा गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि सरकार मिशन मोड में काम कर रही है और पड़ोसी राज्यों हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ तालमेल बिठाकर यमुना को साफ करने की कोशिश की जा रही है।