Delhi के शहरी गांव बेसहारा, बुनियादी सुविधाओं की कमी और जमीन के मालिकाना हक को लेकर ग्रामीण परेशान

Delhi: राजधानी दिल्ली को चलाने और सहारा देने वाले इसके शहरी गांव खुद आज बदहाली का सामना कर रहे हैं। इन गांवों में रहने वाले लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और प्रशासन द्वारा की गई कोशिशें केवल खानापूर्ति मानी जा

Delhi: राजधानी दिल्ली को चलाने और सहारा देने वाले इसके शहरी गांव खुद आज बदहाली का सामना कर रहे हैं। इन गांवों में रहने वाले लोग बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और प्रशासन द्वारा की गई कोशिशें केवल खानापूर्ति मानी जा रही हैं। हाल ही में नवजीवन में प्रकाशित एक लेख में इन गांवों की गंभीर स्थिति और वहां मौजूद जोखिमों को उजागर किया गया है।

दिल्ली के पुराने गांवों और कॉलोनियों में ओ-जोन (O-zone) को लेकर हो रही कार्रवाई के खिलाफ 21 जून 2026 को शास्त्री पार्क के श्री सिद्ध बाबा श्यामगिरी सवाई मठ मंदिर परिसर में एक पंचायत हुई। यहां ग्रामीणों ने ओ-जोन हटाने के लिए एक ठोस कानून बनाने की मांग की और ‘ओ-जोन से मुक्ति संघर्ष समिति’ बनाने का फैसला किया। इस मौके पर कांग्रेस नेता डॉ. नरेश कुमार, चौधरी अनिल कुमार और आप विधायक कुलदीप कुमार व संजीव झा ने लोगों को मदद का भरोसा दिया।

जमीन के मालिकाना हक को लेकर भी ग्रामीण काफी परेशान हैं। 8 जनवरी 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि खिड़की और खानपुर जैसे गांव, जो 1963 और 1967 में शहरीकृत हुए थे, उनकी जमीन DDA अधिनियम 1954 की धारा 105 के तहत केंद्र सरकार या DDA में निहित हो गई है। दिक्कत यह है कि खसरों में ये जमीनें अभी भी ‘अधिग्रहित भूमि’ के रूप में दर्ज हैं। इस वजह से गांव वालों को बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर बनाने के लिए बैंक से लोन लेने में बहुत मुश्किल आ रही है।

हालांकि, कुछ राहत की खबरें भी हैं। मई 2026 में MCD की स्थायी समिति की अध्यक्ष सत्या शर्मा ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के मास्टर प्लान-2041 के तहत 48 गांवों को शहरी दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह फैसला दिल्ली नगर निगम अधिनियम 1957 की धारा 507(ए) के तहत लिया गया है। इससे इन इलाकों में सड़क, सीवर, पीने का पानी और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाओं में सुधार होने की उम्मीद है। इस प्रस्ताव को अब निगम सदन और फिर केंद्र सरकार के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

इससे पहले 20 सितंबर 2024 को उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना ने शहरीकृत गांवों में विरासत के आधार पर कृषि भूमि के म्यूटेशन (mutation) की अनुमति दी थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी एक जनहित याचिका (PIL) पर संज्ञान लेते हुए कहा कि ग्रामीणों के मौलिक अधिकारों और संपत्ति के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, इसलिए संबंधित विभाग तुरंत कार्रवाई करें। प्रशासनिक तौर पर दिल्ली के सभी 352 गांवों को शहरी घोषित किया जा चुका है, लेकिन हकीकत में कई गांवों में आज भी शहर जैसी सुविधाएं नहीं हैं और लाल डोरा क्षेत्रों की कानूनी उलझनों के कारण विकास रुका हुआ है।