Delhi: दिल्ली की हवा में प्रदूषण का तरीका बदल रहा है। अब शहर में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी गैसें तो कम हुई हैं, लेकिन ओजोन (Ozone) का स्तर तेजी से बढ़ा है। एक नए एयर क्वालिटी डैशबोर्ड से
Delhi: दिल्ली की हवा में प्रदूषण का तरीका बदल रहा है। अब शहर में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO2) और कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) जैसी गैसें तो कम हुई हैं, लेकिन ओजोन (Ozone) का स्तर तेजी से बढ़ा है। एक नए एयर क्वालिटी डैशबोर्ड से पता चला है कि यह समस्या अब सिर्फ गर्मियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि साल भर बनी रहती है।
ओजोन प्रदूषण में कितनी बढ़ोत्तरी हुई?
Envirocatalysts नाम की संस्था ने CPCB के डेटा के आधार पर एक डैशबोर्ड जारी किया है। इसमें बताया गया है कि दिल्ली में ओजोन का सालाना औसत 2021 में 52 µg/m³ था, जो 2025 तक बढ़कर 66 µg/m³ हो गया। साल 2024 में सिर्फ 33 दिन ऐसे थे जब ओजोन का स्तर ज्यादा था, लेकिन 2025 में यह संख्या बढ़कर 76 दिन हो गई।
किन शहरों पर है इसका असर और कैसे बनता है ओजोन?
यह समस्या सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है। UP के मेरठ, नोएडा और मुजफ्फरनगर जैसे शहरों में भी ओजोन का स्तर काफी बढ़ा है। ग्राउंड लेवल ओजोन सीधे हवा में नहीं घुलता, बल्कि जब सूरज की तेज रोशनी नाइट्रोजन ऑक्साइड और वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स के बीच केमिकल रिएक्शन कराती है, तब यह बनता है। इसी वजह से मई के महीने में इसका स्तर सबसे ज्यादा रहता है।
सेहत पर क्या पड़ता है बुरा असर?
जमीन के करीब मौजूद ओजोन हवा के जरिए फेफड़ों में जाकर नुकसान पहुंचाता है। इससे सांस की नली में जलन होती है और फेफड़ों की काम करने की क्षमता कम हो जाती है। जिन लोगों को पहले से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या सांस की बीमारी है, उनकी हालत और बिगड़ सकती है। साथ ही, इससे शरीर में इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ओजोन प्रदूषण दिल्ली और आसपास के किन शहरों में बढ़ा है?
दिल्ली के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के नोएडा, मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे शहरों में ओजोन के स्तर में काफी बढ़ोत्तरी देखी गई है।
ग्राउंड लेवल ओजोन सेहत के लिए क्यों खतरनाक है?
यह सांस की नली में जलन पैदा करता है, फेफड़ों की कार्यक्षमता घटाता है और अस्थमा व ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों को और गंभीर बना देता है।