Delhi : दिल्ली में नशा छुड़ाने के नाम पर चल रहे कई अनरजिस्टर्ड सेंटर्स अब लोगों के लिए जानलेवा बन गए हैं। हाल ही में दो परिवारों ने अपने बेटों को इन केंद्रों में खो दिया, जहाँ इलाज के बजाय उनके साथ मारपीट हुई। कई सेंटर त
Delhi : दिल्ली में नशा छुड़ाने के नाम पर चल रहे कई अनरजिस्टर्ड सेंटर्स अब लोगों के लिए जानलेवा बन गए हैं। हाल ही में दो परिवारों ने अपने बेटों को इन केंद्रों में खो दिया, जहाँ इलाज के बजाय उनके साथ मारपीट हुई। कई सेंटर तो सिर्फ पैसे कमाने का जरिया बन चुके हैं, जहाँ मरीजों को बुनियादी सुविधाएं तक नहीं मिल रही हैं।
इन सेंटर्स में क्या हो रहा है और हालिया घटनाएं क्या हैं?
दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में अवैध नशा मुक्ति केंद्रों में हिंसा की खबरें सामने आई हैं। 27 मार्च 2026 को उत्तर-पश्चिम दिल्ली के अलीपुर में एक मरीज की जान चली गई। इससे करीब तीन महीने पहले दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के ढिचाओ कलां में भी एक मरीज को पीट-पीटकर मार दिया गया था। दिसंबर 2024 में एक जांच में तो यह भी पता चला कि पश्चिम दिल्ली का एक सेंटर मरीजों को ठीक करने के बजाय उन्हें ड्रग्स सप्लाई कर रहा था।
नियम क्या हैं और कितने सेंटर रजिस्टर्ड हैं?
नियमों के मुताबिक, किसी भी नशा मुक्ति केंद्र को State Mental Health Authority के पास रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। Mental Healthcare Act 2017 के तहत मरीज की सहमति के बिना उसे भर्ती नहीं किया जा सकता। लेकिन दिल्ली की जमीनी हकीकत अलग है। अधिकारियों के अनुसार, शहर में सेंटर्स की संख्या बहुत ज्यादा है, लेकिन केवल 50 के करीब ही रजिस्टर्ड हैं।
इन अवैध सेंटर्स की असलियत क्या है?
| मुख्य समस्या |
असर/विवरण |
| मानवाधिकार उल्लंघन |
35% लोग बिना मर्जी के भर्ती किए गए |
| बुनियादी सुविधाओं की कमी |
साफ खाना और दवाओं का अभाव |
| गैरकानूनी काम |
मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स की तस्करी का जरिया |
| स्टाफ की कमी |
क्वालिफाइड डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी |
| भारी फीस |
बिना इलाज के मोटी रकम वसूली |
एंटी-नार्कोटिक्स सेल के अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट सेंटर्स अब एक बड़ा बिजनेस बन गए हैं। ये सेंटर आक्रामक मार्केटिंग करके परिवारों को लुभाते हैं, लेकिन अंदर जाकर मरीजों की हालत बदतर हो जाती है। दिल्ली हाई कोर्ट ने अगस्त 2024 में इन केंद्रों की जांच के आदेश दिए थे ताकि जबरन भर्ती और प्रताड़ना को रोका जा सके।