Delhi University की चेतावनी, CJP विरोध प्रदर्शनों से दूर रहें छात्र, हो सकती है सख्त कार्रवाई
Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने अपने छात्रों को CJP के विरोध प्रदर्शनों में शामिल न होने की सलाह दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साफ कहा है कि जो छात्र इन प्रदर्शनों का हिस्सा बनेंगे, उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना
Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने अपने छात्रों को CJP के विरोध प्रदर्शनों में शामिल न होने की सलाह दी है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साफ कहा है कि जो छात्र इन प्रदर्शनों का हिस्सा बनेंगे, उन्हें गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। प्रशासन का मानना है कि छात्रों को अपनी पढ़ाई और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए न कि राजनीतिक गतिविधियों में पड़ना चाहिए।
दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने 23 जुलाई 2026 को कहा कि छात्रों को किसी का ‘राजनीतिक टूल’ नहीं बनना चाहिए। यूनिवर्सिटी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर यह भी लिखा कि कुछ निहित स्वार्थ वाले लोग छात्रों के डर का फायदा उठा रहे हैं। इसी बीच, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने भी देशभर के वाइस चांसलर्स को पत्र लिखकर छात्रों को पढ़ाई के प्रति केंद्रित रहने की सलाह दी है।
यूनिवर्सिटी ने कैंपस के भीतर किसी भी तरह की सभा या विरोध प्रदर्शन के लिए कड़े नियम लागू किए हैं। अब किसी भी रैली या धरने के लिए कम से कम 72 घंटे पहले लिखित अनुमति लेना अनिवार्य है। यह आवेदन प्रॉक्टर ऑफिस और स्थानीय पुलिस (DCP/SHO) को देना होगा। इसके अलावा, कैंपस के अंदर बाहरी लोगों को लाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। नियमों का पालन न करने वाले छात्रों को रस्टिकेशन (निकाले जाना), निष्कासन या पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
दूसरी ओर, Cockroach Janta Party (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने 22 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ 10 FIR दर्ज की हैं। एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कहा है कि अगर सरकार छात्रों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न करने का भरोसा देती है, तो वे अपना अनिश्चितकालीन अनशन खत्म कर देंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 जुलाई को घोषणा की कि पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों को जल्द और कड़ी सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। वहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने जंतर-मंतर पर हुए CJP विरोध प्रदर्शन की जांच की मांग करने वाली एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करने की सहमति जताई है।