Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में पिछले कुछ सालों से ग्रेजुएशन की हजारों सीटें खाली रह रही हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन अब कुछ कोर्स और उनके कॉम्बिनेशन में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। प्रशासन
Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में पिछले कुछ सालों से ग्रेजुएशन की हजारों सीटें खाली रह रही हैं। इस समस्या को सुलझाने के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन अब कुछ कोर्स और उनके कॉम्बिनेशन में बदलाव करने पर विचार कर रहा है। प्रशासन का मकसद उन कोर्स को फिर से व्यवस्थित करना है जिनमें छात्र कम रुचि ले रहे हैं ताकि सीटों को भरा जा सके।
सीटें खाली रहने का क्या है पूरा मामला?
यूनिवर्सिटी के आंकड़ों के मुताबिक, कई सालों से एडमिशन राउंड खत्म होने के बाद भी सीटें खाली रह जाती हैं। सितंबर 2025 में कुल 71,624 सीटों में से 7,000 से ज्यादा सीटें खाली थीं और अक्टूबर 2025 के आखिरी राउंड के बाद भी 4,000 से ज्यादा सीटें नहीं भरी गईं। एडमिशन डीन हनीत गांधी ने बताया कि ज्यादातर सीटें उन कोर्स में खाली रहती हैं जिनकी मांग कम है या जो कॉलेज दूरदराज के इलाकों में हैं।
यूनिवर्सिटी अब क्या बदलाव करने जा रही है?
DU पैनल ने सुझाव दिया है कि जिन कोर्स में छात्र कम आ रहे हैं, उनके स्ट्रक्चर को बदला जाए। विशेष रूप से BA प्रोग्राम के कॉम्बिनेशन को फिर से देखा जाएगा। इसके लिए कॉलेजों से 2026-27 सत्र के लिए सीट मैट्रिक्स की समीक्षा करने को कहा गया है।
- कम डिमांड वाले कोर्स: ऑफिस मैनेजमेंट और सेक्रेटेरियल प्रैक्टिस (OMSP) जैसे कोर्स और कुछ भारतीय भाषाओं वाले BA कॉम्बिनेशन में कम छात्र आ रहे हैं।
- सीटों का बंटवारा: जिन कोर्स में डिमांड ज्यादा है, वहां सीटें बढ़ाई जा सकती हैं और कम डिमांड वाले कोर्स के सीटों को पुनर्वितरित किया जा सकता है।
- फैकल्टी का विरोध: कुछ प्रोफेसर इस बदलाव का विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि इससे भारतीय भाषाओं के कोर्स और शैक्षणिक विविधता पर असर पड़ सकता है।
कुल सीटों और एडमिशन का विवरण
| समय/स्थिति |
सीटों की स्थिति |
| जुलाई 2025 (प्रथम राउंड) |
करीब 12,000 सीटें खाली |
| सितंबर 2025 |
7,000 से ज्यादा सीटें खाली |
| अक्टूबर 2025 (अंतिम राउंड) |
4,000 से ज्यादा सीटें खाली |
| कुल स्वीकृत सीटें (2025) |
71,642 |
| कुल एडमिशन (2025) |
72,229 |
वाइस चांसलर योगेश सिंह ने साफ किया है कि कम छात्रों की वजह से किसी भी कोर्स को पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि CUET सिस्टम से एडमिशन प्रक्रिया पहले से ज्यादा पारदर्शी हुई है और खाली सीटों का कारण सिर्फ CUET नहीं है, क्योंकि यह समस्या पहले भी थी।