Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने सेंट स्टीफंस कॉलेज की नई प्रिंसिपल प्रोफेसर Susan Elias की नियुक्ति को रोक दिया है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि इस चयन प्रक्रिया में UGC के नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसकी वजह से यह नि
Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने सेंट स्टीफंस कॉलेज की नई प्रिंसिपल प्रोफेसर Susan Elias की नियुक्ति को रोक दिया है। यूनिवर्सिटी का कहना है कि इस चयन प्रक्रिया में UGC के नियमों का पालन नहीं किया गया, जिसकी वजह से यह नियुक्ति मान्य नहीं है। इस फैसले से कॉलेज में एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है क्योंकि प्रोफेसर इलियास इस कॉलेज की पहली महिला प्रिंसिपल बनने वाली थीं।
नियुक्ति रोकने की मुख्य वजह क्या है?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार Vikas Gupta ने 14 मई 2026 को एक पत्र लिखकर कॉलेज को नियुक्ति न करने का निर्देश दिया। DU के मुताबिक, UGC Regulations 2018 के तहत चयन समिति में कुलपति (Vice-Chancellor) द्वारा नामित विशेषज्ञों का होना जरूरी था, लेकिन कॉलेज ने उनसे विशेषज्ञों के नाम नहीं मांगे। यूनिवर्सिटी ने साफ कहा कि बिना सही प्रक्रिया के की गई यह सिफारिश लागू नहीं की जा सकती।
कॉलेज और यूनिवर्सिटी के बीच क्या है विवाद?
सेंट स्टीफंस कॉलेज के चेयरमैन Rt Revd Dr Paul Swarup ने 12 मई को प्रोफेसर Susan Elias की नियुक्ति की घोषणा की थी और कहा था कि सारी प्रक्रिया सही तरीके से पूरी की गई है। वहीं, कॉलेज की तरफ से वकील Romy Chacko ने कहा कि 2008 के एक हाई कोर्ट फैसले के मुताबिक अल्पसंख्यक संस्थान होने के नाते कॉलेज को अपना प्रिंसिपल चुनने का हक है। फिलहाल प्रोफेसर इलियास और कॉलेज चेयरमैन की तरफ से इस मामले पर कोई नई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
UGC नियमों के मुताबिक चयन समिति कैसी होनी चाहिए?
- गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन इस समिति के अध्यक्ष होंगे।
- चेयरमैन द्वारा नामित गवर्निंग बॉडी के दो सदस्य शामिल होंगे।
- कुलपति (VC) द्वारा नामित दो उच्च शिक्षा विशेषज्ञ होने चाहिए।
- इन विशेषज्ञों में से कम से कम एक व्यक्ति संबद्ध यूनिवर्सिटी से बाहर का होना चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
प्रोफेसर Susan Elias की नियुक्ति क्यों रोकी गई?
दिल्ली यूनिवर्सिटी के अनुसार, चयन समिति बनाते समय UGC Regulations 2018 का पालन नहीं किया गया और कुलपति के विशेषज्ञों को शामिल नहीं किया गया, इसलिए नियुक्ति को अवैध माना गया।
सेंट स्टीफंस कॉलेज का इस मामले पर क्या पक्ष है?
कॉलेज प्रशासन का दावा था कि नियुक्ति प्रक्रिया सही थी। उनके वकील के अनुसार, अल्पसंख्यक संस्थान होने के नाते उन्हें योग्य उम्मीदवारों को चुनने का अधिकार है।