Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने अपने कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को कंट्रोल करने वाली पॉलिसी पर काम रोकने का फैसला किया है। यूनिवर्सिटी ने माना कि स्टाफ के सोशल मीडिया अकाउंट्स को रेगुलेट करना मुमकिन नहीं है। क
Delhi: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) ने अपने कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल को कंट्रोल करने वाली पॉलिसी पर काम रोकने का फैसला किया है। यूनिवर्सिटी ने माना कि स्टाफ के सोशल मीडिया अकाउंट्स को रेगुलेट करना मुमकिन नहीं है। करीब तीन साल पहले इस दिशा में कोशिशें शुरू हुई थीं, लेकिन अब इसे ‘नॉट फिजिबल’ यानी अव्यवहारिक बताकर खारिज कर दिया गया है।
सोशल मीडिया पॉलिसी क्यों नहीं बन पाई?
यूनिवर्सिटी के एक अधिकारी ने बताया कि कर्मचारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल निजी तौर पर करते हैं। ऐसे में उनके पर्सनल अकाउंट्स की निगरानी के लिए कोई पॉलिसी बनाना संभव नहीं था। दिसंबर 2023 में प्रोफेसर संजीव सिंह की अध्यक्षता में छह सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी, लेकिन काफी चर्चाओं के बाद भी कमेटी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी।
टीचर्स ने क्यों जताया था विरोध?
जब इस पॉलिसी की बात शुरू हुई थी, तब यूनिवर्सिटी के कई शिक्षकों ने इसका कड़ा विरोध किया था। एकेडमिक काउंसिल की सदस्य माया जॉन और अन्य प्रोफेसरों का कहना था कि ऐसी किसी भी पॉलिसी से कैंपस में अभिव्यक्ति की आजादी और लोकतांत्रिक अधिकारों पर असर पड़ेगा। उनका मानना था कि यह कदम अकादमिक स्वतंत्रता को कम कर सकता है।
हंसराज कॉलेज के मामले से क्या है संबंध?
हाल ही में Hansraj College ने सोशल मीडिया पोस्ट के कारण कुछ छात्रों को सस्पेंड किया था। इस मामले पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने साफ किया कि कॉलेज के अंदरूनी मामले कॉलेज प्रशासन ही देखता है। स्टाफ के लिए सोशल मीडिया पॉलिसी बनाने का फैसला और कॉलेज के छात्रों पर की गई कार्रवाई दो अलग-अलग बातें हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
DU ने सोशल मीडिया पॉलिसी बनाने का फैसला क्यों बदला?
यूनिवर्सिटी ने पाया कि कर्मचारी अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स का इस्तेमाल निजी क्षमता में करते हैं, इसलिए उनकी निगरानी के लिए नियम बनाना संभव नहीं था।
इस पॉलिसी को बनाने के लिए कमेटी कब बनी थी?
सोशल मीडिया पॉलिसी तैयार करने के लिए 8 दिसंबर 2023 को छह सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी, जिसके चेयरमैन प्रोफेसर संजीव सिंह थे।