Delhi की DU, JNU और Jamia यूनिवर्सिटी ने छात्रों को किया आगाह, Jantar Mantar के प्रदर्शनों से दूर रहने की सलाह
Delhi: दिल्ली की बड़ी यूनिवर्सिटीज ने अपने छात्रों को जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों से दूर रहने की चेतावनी दी है। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के बाद अब JNU और जामिया मिलिया इस्लामिया ने भी एडवाइजरी जारी की है। यूनिवर्सिटी प
Delhi: दिल्ली की बड़ी यूनिवर्सिटीज ने अपने छात्रों को जंतर मंतर पर हो रहे प्रदर्शनों से दूर रहने की चेतावनी दी है। दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) के बाद अब JNU और जामिया मिलिया इस्लामिया ने भी एडवाइजरी जारी की है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने छात्रों से अपील की है कि वे विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के बजाय अपनी पढ़ाई पर ध्यान दें।
यह पूरा मामला NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर शुरू हुआ है। छात्र जंतर मंतर पर इकट्ठा होकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसी बीच 23 जुलाई को DU ने सबसे पहले चेतावनी दी थी कि गैरकानूनी प्रदर्शनों में हिस्सा लेने से छात्रों के करियर और भविष्य पर बुरा असर पड़ सकता है। इसके बाद 24 जुलाई को JNU और जामिया ने भी अपने छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ के लिए निर्देश जारी किए।
JNU ने अपनी एडवाइजरी में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए छात्रों को जिम्मेदार बनने और अपनी सुरक्षा को प्राथमिकता देने को कहा है। यूनिवर्सिटी ने यह भी चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर गलत तरीके से पोस्ट डालने पर अनुशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, जामिया मिलिया इस्लामिया ने छात्रों को समझाया कि कड़ी मेहनत से बनाए गए अपने भविष्य को जोखिम में न डालें। जामिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस आश्वासन का जिक्र किया जिसमें कहा गया था कि छात्रों के हितों की रक्षा की जाएगी।
दूसरी तरफ, दिल्ली पुलिस प्रदर्शनकारियों पर कड़ी नजर रखे हुए है। पुलिस उन भाषणों की जांच कर रही है जो 18 जुलाई को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के हटने के बाद दिए गए थे, ताकि यह पता चल सके कि 20 जुलाई की हिंसा के पीछे कोई भड़काऊ बयान तो नहीं था। इस बीच, दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है जिसमें पुलिस द्वारा फेस रिकग्निशन तकनीक और निगरानी के इस्तेमाल को चुनौती दी गई है।
राजनीतिक गलियारों में इस पर बहस छिड़ गई है। राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं ने यूनिवर्सिटीज की इस एडवाइजरी की आलोचना की है। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों को दबाने की कोशिश है। वहीं, एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज (AIU) ने सभी वाइस चांसलर से कहा है कि वे छात्रों को समझाएं कि लंबे समय तक चलने वाले आंदोलन से उनकी पढ़ाई का नुकसान होता है।