Delhi: केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने मिलकर राजधानी की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का बड़ा फैसला लिया है। इस कदम से करीब 45 से 50 लाख लोगों को सीधा फायदा होगा और उन्हें अपने घर के कानूनी कागज मिल सकेंगे। केंद्
Delhi: केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार ने मिलकर राजधानी की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को नियमित करने का बड़ा फैसला लिया है। इस कदम से करीब 45 से 50 लाख लोगों को सीधा फायदा होगा और उन्हें अपने घर के कानूनी कागज मिल सकेंगे। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 7 अप्रैल 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी जानकारी दी।
नियमितीकरण के नियम और आवेदन का तरीका क्या है?
सरकार ने इन कॉलोनियों को “जहां है, जैसा है” (As-is, where-is) के आधार पर नियमित करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब है कि मौजूदा मकानों को बिना किसी नए लेआउट प्लान के मान्यता दी जाएगी। आवेदन की प्रक्रिया 24 अप्रैल 2026 से MCD के SWAGAM पोर्टल पर शुरू होगी। आवेदन करने के बाद 45 दिनों के भीतर मालिकाना हक के दस्तावेज (कन्वेयंस डीड) जारी करने का लक्ष्य रखा गया है।
नया निर्माण और निगरानी के क्या नियम होंगे?
सरकार ने साफ कर दिया है कि 6 अप्रैल 2026 के बाद इन कॉलोनियों में किसी भी तरह का नया निर्माण नहीं होगा। इसकी निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। सर्वे ऑफ इंडिया की मदद से MCD ड्रोन सर्वे कर रहा है, जिसका 20 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। साथ ही, अब इस पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी DDA के बजाय दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग के पास होगी।
सुविधाओं और बजट को लेकर क्या प्रावधान हैं?
इन कॉलोनियों के बुनियादी ढांचे को सुधारने के लिए दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में 800 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। साथ ही, छोटे दुकानदारों को राहत देते हुए 6 मीटर चौड़ी सड़क पर 20 वर्ग मीटर और उससे कम चौड़ी सड़क पर 10 वर्ग मीटर तक के स्टोर को नियमित किया जाएगा। सभी प्लॉट और भवनों का उपयोग अब आवासीय माना जाएगा।
| मुख्य विवरण |
जानकारी |
| कुल नियमित कॉलोनियां |
1511 |
| लाभान्वित लोग |
45 से 50 लाख |
| आवेदन शुरू होने की तारीख |
24 अप्रैल 2026 |
| आवेदन पोर्टल |
SWAGAM पोर्टल (MCD) |
| दस्तावेज मिलने का समय |
45 दिन |
| निगरानी का तरीका |
ड्रोन सर्वे |