Delhi: सड़क हादसे में शराब पीने मात्र से पीड़ित दोषी नहीं, ट्रिब्यूनल ने दिया बड़ा फैसला

Delhi: दिल्ली के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि सड़क हादसे के समय पीड़ित के शरीर में शराब की मौजूदगी या सांसों से शराब की गंध आने मात्र से यह नहीं माना जाएगा कि गलती उसकी

Delhi: दिल्ली के मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने एक अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि सड़क हादसे के समय पीड़ित के शरीर में शराब की मौजूदगी या सांसों से शराब की गंध आने मात्र से यह नहीं माना जाएगा कि गलती उसकी थी। इस फैसले के बाद अब बीमा कंपनियों के लिए केवल शराब के आधार पर मुआवजे की राशि कम कराना मुश्किल होगा।

यह मामला 21 साल के सचिन धवन का था, जिनका जुलाई 2018 में एक्सीडेंट हुआ था। इस हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं और वे 40% स्थायी विकलांगता का शिकार हो गए। ट्रिब्यूनल के प्रेसिडिंग ऑफिसर शिरीष अग्रवाल ने 6 जून 2026 को दिए अपने आदेश में सचिन को 30.77 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक यह साबित न हो कि शराब की मात्रा तय सीमा से ज्यादा थी और उसी वजह से हादसा हुआ, तब तक पीड़ित को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि अगर किसी ने शराब पी रखी थी, तो भी यह दूसरी गाड़ी चलाने वाले को लापरवाही से गाड़ी चलाने का अधिकार नहीं देता। इसके अलावा कोर्ट ने हेलमेट न पहनने या ड्राइविंग लाइसेंस न होने को भी हादसे की सीधी वजह नहीं माना। कोर्ट के मुताबिक, लाइसेंस न होना एक नियम का उल्लंघन है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति लापरवाही से गाड़ी चला रहा था।

मामले की सुनवाई के दौरान ट्रक ड्राइवर कोर्ट में पेश नहीं हुआ, जिसे कोर्ट ने अपने खिलाफ माना। ट्रिब्यूनल ने कहा कि ट्रक ड्राइवर ही सबसे सही गवाह होता जो यह बता सकता था कि हादसा कैसे हुआ और क्या पीड़ित की कोई गलती थी। इस फैसले के बाद अब ट्रक के मालिक और ड्राइवर को मुआवजे की राशि चुकानी होगी।