Delhi में 30 साल बाद होगी पेड़ों की गिनती, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने जारी किए 2.9 करोड़ रुपये

Delhi: राजधानी दिल्ली में पेड़ों की गिनती यानी ट्री सेंसस का काम पिछले 30 सालों से रुका हुआ था। अब सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश और केंद्र सरकार की मदद से इस काम में तेजी आई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा

Delhi: राजधानी दिल्ली में पेड़ों की गिनती यानी ट्री सेंसस का काम पिछले 30 सालों से रुका हुआ था। अब सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश और केंद्र सरकार की मदद से इस काम में तेजी आई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घोषणा की है कि शहर में पहली बार बड़े पैमाने पर पेड़ों की जनगणना की जाएगी ताकि हरियाली का सही रिकॉर्ड रखा जा सके।

दिल्ली वृक्ष संरक्षण अधिनियम 1994 के तहत दिल्ली ट्री अथॉरिटी (DTA) की जिम्मेदारी थी कि वह शहर के पेड़ों का हिसाब रखे, लेकिन यह काम दशकों तक लंबित रहा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस ए.एस. ओका ने दिसंबर 2024 में साफ कहा था कि जब तक पेड़ों का डेटा नहीं होगा, तब तक अवैध कटाई को रोकना नामुमकिन है। कोर्ट ने ट्री अथॉरिटी को 10 फरवरी 2025 तक इस काम की पूरी योजना और समय-सीमा का हलफनामा देने का आदेश दिया था।

इस अभियान को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने शुरुआती चरण के लिए 2.9 करोड़ रुपये दिए हैं। यह पूरी प्रक्रिया चार साल में तीन चरणों में पूरी होगी। इसमें मुख्य रूप से उन इलाकों के पेड़ों को गिना जाएगा जो वन क्षेत्र में नहीं आते, जैसे कि रिहायशी कॉलोनियां और शहरी इलाके। पहले साल में इस काम का तरीका तय किया जाएगा और एक पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा।

पेड़ों की सही गिनती के लिए एक्सपर्ट्स की मदद ली जा रही है। सुनील लिमये, एम.डी. सिन्हा और प्रदीप कृष्णन जैसे विशेषज्ञों को इस काम के लिए नियुक्त किया गया है। साथ ही, वन अनुसंधान संस्थान (FRI) देहरादून इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा। इससे पहले नगर निगम दिल्ली (MCD) ने AI तकनीक से पेड़ों को गिनने की कोशिश की थी, लेकिन वह काम पूरी तरह सफल नहीं हो पाया था।

दूसरी तरफ, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने भी दिल्ली प्रशासन को फटकार लगाई है। NGT ने आदेश दिया है कि पिछले पांच साल में कितने पेड़ अवैध तरीके से काटे गए और उन पर क्या कार्रवाई हुई, इसका पूरा रिकॉर्ड तीन महीने के भीतर जनता के सामने रखा जाए।