Delhi: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ट्रैफिक वसूली करने वाले एक बड़े गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पुलिस ने इस सिंडिकेट के खिलाफ MCOCA (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट) के तहत चार्जशीट दाखिल की है औ
Delhi: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने ट्रैफिक वसूली करने वाले एक बड़े गिरोह के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। पुलिस ने इस सिंडिकेट के खिलाफ MCOCA (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गनाइज्ड क्राइम एक्ट) के तहत चार्जशीट दाखिल की है और उनकी 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति कुर्क कर ली है। यह गिरोह पिछले करीब 10 सालों से कमर्शियल और प्राइवेट गाड़ियों के मालिकों के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को भी अपना निशाना बना रहा था।
यह वसूली गिरोह कैसे काम करता था?
यह गैंग ट्रैफिक नियमों के नाम पर एक ‘पैरेलल सिस्टम’ चला रहा था। ये लोग ड्राइवरों को 2,000 से 5,000 रुपये महीना लेकर अनधिकृत स्टिकर और की-रिंग बेचते थे। इसके बदले में ड्राइवरों को भरोसा दिया जाता था कि उन्हें जुर्माना नहीं भरना पड़ेगा और ‘नो-एंट्री’ के समय भी वे आसानी से निकल सकेंगे। गिरोह के सदस्य व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए आपस में जुड़े थे और ड्राइवरों को निर्देश देते थे कि पुलिस कर्मियों को डराने के लिए अपने बड़े संपर्कों का नाम लें।
पुलिस कर्मियों को ब्लैकमेल करने का तरीका
जांच में पता चला कि यह गिरोह ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को ब्लैकमेल करने के लिए छिपे हुए कैमरों का इस्तेमाल करता था। वे वीडियो को मैनिपुलेट करते थे और फर्जी शिकायतें करके पुलिस वालों पर दबाव बनाते थे ताकि उनके ‘प्रोटेक्टेड’ वाहनों को छोड़ दिया जाए। इस मामले में मोड़ तब आया जब गिरोह के मास्टरमाइंड ने महिला ट्रैफिक अधिकारियों को निशाना बनाया और पैसों के अलावा गलत मांगें शुरू कर दीं।
कौन हैं इस सिंडिकेट के मुख्य आरोपी?
पुलिस ने इस मामले में कुल पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी राजकुमार उर्फ राजू मीणा और जीशान अली हैं। इनके साथ मुकेश कुमार उर्फ पकौड़ी और संजय गुप्ता को भी चार्जशीट में नामजद किया गया है। राजू मीणा की पत्नी सुरेखा रानी को भी गिरफ्तार किया गया है, क्योंकि उसने अपराध की कमाई से संपत्ति बनाने और मनी लॉन्ड्रिंग में मदद की थी। क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी एंड स्नैचिंग सेल ने साकेत कोर्ट में 3,000 पन्नों से ज्यादा की चार्जशीट पेश की है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
MCOCA कानून इस केस में क्यों लगाया गया?
दिल्ली पुलिस कमिश्नर सतीश गोलचा के आदेश पर लगभग 15 अलग-अलग FIR को एक साथ जोड़ा गया। चूंकि यह एक संगठित अपराध था जिसमें जबरन वसूली और ब्लैकमेलिंग शामिल थी, इसलिए सख्त MCOCA की धारा 3 और 4 लगाई गई।
गिरोह के खिलाफ कितनी संपत्ति जब्त की गई है?
पुलिस ने जांच में पाया कि आरोपियों की घोषित आय और उनकी संपत्ति में बहुत बड़ा अंतर था। इसी आधार पर गिरोह से जुड़ी 10 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति को अटैच (कुर्क) किया गया है।