Delhi: दिल्ली के अलग-अलग टोल नाकों पर लगने वाले लंबे जाम की वजह से आम जनता और ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इन जामों के कारण सालाना 472 करोड़ रुपये से ज्यादा का ईंधन बर्बाद हो जाता है। अगर
Delhi: दिल्ली के अलग-अलग टोल नाकों पर लगने वाले लंबे जाम की वजह से आम जनता और ट्रांसपोर्टरों को भारी नुकसान हो रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, इन जामों के कारण सालाना 472 करोड़ रुपये से ज्यादा का ईंधन बर्बाद हो जाता है। अगर MCD दो महीने के लिए टोल फ्री कर दे, तो इस बड़ी बर्बादी को रोका जा सकता है और ईंधन की काफी बचत होगी।
ईंधन की कितनी होगी बचत
अगर टोल नाकों पर जाम की समस्या खत्म होती है, तो डीजल, पेट्रोल और सीएनजी की भारी बचत होगी। इसका विवरण इस प्रकार है:
| ईंधन का प्रकार |
बचत की मात्रा |
बचत की राशि |
| डीजल |
78 लाख लीटर |
68.4 करोड़ रुपये |
| पेट्रोल |
246 करोड़ लीटर |
246 करोड़ रुपये |
| सीएनजी (CNG) |
3.70 लाख किलोग्राम |
171 करोड़ रुपये |
दिल्ली में मुख्य रूप से 13 टोल नाके हैं जहाँ जाम की समस्या ज्यादा रहती है। इनमें गाजीपुर मेन, गाजीपुर ओल्ड, कालिंदी कुंज, डीएनडी और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे की फ्री लेन शामिल हैं।
जाम हटाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने दिल्ली के अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-2) पर मुंडका-बक्करवाला टोल कॉरिडोर पर एक नई हाई-टेक प्रणाली शुरू की है। इसे MLFF (Multi-Lane Free Flow) कहा जाता है। यह सिस्टम FASTag और ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) तकनीक पर काम करता है, जिससे गाड़ियों को रुकना नहीं पड़ेगा और टोल अपने आप कट जाएगा।
वहीं MCD भी अब ANPR-आधारित टोल संग्रह प्रणाली लाने की तैयारी कर रही है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने दिसंबर 2025 में MCD को नौ टोल प्लाजा को अस्थायी रूप से बंद करने या हटाने पर विचार करने का निर्देश दिया था ताकि प्रदूषण और ट्रैफिक कम हो सके। NHAI ने भी जनवरी 2026 में MCD से राजमार्गों पर टोल प्लाजा हटाने की मांग की थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली के किन टोल नाकों पर सबसे ज्यादा जाम लगता है
दिल्ली के 13 प्रमुख टोल नाकों पर जाम की समस्या है, जिनमें गाजीपुर मेन, गाजीपुर ओल्ड, कालिंदी कुंज, डीएनडी और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे की फ्री लेन सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
नई टोलिंग प्रणाली (MLFF) कैसे काम करती है
MLFF प्रणाली FASTag और ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन) तकनीक का उपयोग करती है। इसमें वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होती और टोल राशि अपने आप कट जाती है।