Delhi में अब बिना रुके पार होगा टोल प्लाजा, नियम तोड़ने पर लगेगा 5 गुना जुर्माना, MCD ने बदले नियम
Delhi: दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी चलाने वालों के लिए एक बड़ी राहत और सावधानी वाली खबर सामने आई है. दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर के एंट्री पॉइंट्स पर लगने वाले जाम को कम करने के लिए टोल प्लाजा को पूरी तरह से बैरियर-फ्री बनान
Delhi: दिल्ली-एनसीआर में गाड़ी चलाने वालों के लिए एक बड़ी राहत और सावधानी वाली खबर सामने आई है. दिल्ली नगर निगम (MCD) ने शहर के एंट्री पॉइंट्स पर लगने वाले जाम को कम करने के लिए टोल प्लाजा को पूरी तरह से बैरियर-फ्री बनाने का फैसला लिया है. अब एएनपीआर (ANPR) कैमरों और हाई-टेक सेंसर की मदद से आपकी गाड़ी बिना रुके टोल पार कर सकेगी और पैसा सीधे आपके आरएफआईडी (RFID) या फास्टैग खाते से कट जाएगा.
नगर निगम ने इसके लिए दिल्ली नगर निगम (टोल टैक्स) उप-नियम, 2007 में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है. नए नियमों का मुख्य उद्देश्य टोल चोरी को रोकना और प्रदूषण को कम करना है. यह नई व्यवस्था अक्टूबर 2026 तक दिल्ली के 20 सबसे प्रमुख टोल प्लाजा पर लागू हो जाएगी. इसके बाद दिसंबर 2026 तक दिल्ली के सभी 154 एंट्री पॉइंट्स पर बिना बैरियर वाली तकनीक काम करने लगेगी.
जुर्माने और सख्त कार्रवाई के नए नियम
नई तकनीक के आने से जहां सफर आसान होगा, वहीं लापरवाही भारी पड़ सकती है. अगर आपके खाते में पर्याप्त बैलेंस नहीं है और आप बिना टोल दिए निकल जाते हैं, तो आपको 72 घंटे के भीतर भुगतान करना होगा. ऐसा न करने पर प्रशासन की ओर से सख्त कदम उठाए जाएंगे.
टोल चोरी करने वालों के लिए नियम कुछ इस तरह हैं:
- 5 गुना जुर्माना: टोल न चुकाने पर आपको सामान्य दर से 5 गुना अधिक जुर्माना देना पड़ सकता है.
- गाड़ी की जब्ती: अगर 72 घंटे की समय सीमा के अंदर बकाया नहीं चुकाया गया, तो MCD एक इलेक्ट्रॉनिक वारंट जारी करेगी जिसके तहत अधिकारी आपकी गाड़ी को ज़ब्त कर सकते हैं.
- संपत्ति की नीलामी: वसूली के लिए प्रशासन वाहन या मालिक की दूसरी संपत्ति की नीलामी तक कर सकता है.
यह पूरा प्रोजेक्ट मल्टी-लेन फ्री फ्लो (MLFF) सिस्टम पर आधारित है. इसमें टोल गेट पर आरएफआईडी रीडर, लिडार और रडार जैसी तकनीक का इस्तेमाल होगा ताकि चलती गाड़ी से भी पैसा आसानी से काटा जा सके. दिल्ली में प्रदूषण के सीजन से पहले इन बदलावों को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है ताकि वाहनों के रुकने से होने वाले उत्सर्जन को कम किया जा सके.