Delhi से केदारनाथ जाना होगा आसान, नमो भारत और नई रेल लाइन से घटेगा सफर का समय, जानिए पूरी डिटेल

Uttarakhand: दिल्ली से केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र और राज्य सरकार दो ऐसी रेल परियोजनाओं पर काम कर रही हैं, जिससे चारधाम यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। नमो भारत ट्र

Uttarakhand: दिल्ली से केदारनाथ और बद्रीनाथ की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। केंद्र और राज्य सरकार दो ऐसी रेल परियोजनाओं पर काम कर रही हैं, जिससे चारधाम यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा। नमो भारत ट्रेन का विस्तार और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन पूरी होने के बाद श्रद्धालुओं को घंटों का सफर बहुत कम समय में तय करने की सुविधा मिलेगी।

ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। इस प्रोजेक्ट का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक इसे पूरा करना है। जून 2028 में ऋषिकेश के शिवपुरी से ब्यासी तक पहला ट्रायल रन किया जाएगा, जिसके बाद दिसंबर 2029 तक कर्णप्रयाग तक ट्रेन चलाने का लक्ष्य है। 20 मई 2026 से इस लाइन पर पटरियां बिछाने का काम भी शुरू हो गया है।

इस रेल परियोजना की मुख्य बातें नीचे दी गई टेबल में देखें:

विवरण जानकारी
कुल लंबाई 125 किलोमीटर
मुख्य सुरंगें 16 सुरंगें (104 किमी)
एस्केप सुरंगें 12 सुरंगें (98 किमी)
कुल पुल 35 पुल
अनुमानित लागत ₹38,953 करोड़
पूर्ण होने की तिथि दिसंबर 2028

दूसरी तरफ, दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर को हरिद्वार और ऋषिकेश तक बढ़ाने की योजना है। इस 150 किलोमीटर लंबे मार्ग को उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और दिल्ली सरकार की मंजूरी मिल गई है। यह ट्रेन 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर से ऋषिकेश पहुंचने में अब 5-6 घंटे के बजाय सिर्फ 2.5 से 3 घंटे लगेंगे।

इन दोनों प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से यात्रा के समय में भारी कमी आएगी:

  • दिल्ली से कर्णप्रयाग: सफर का समय 11-13 घंटे से घटकर 5-6 घंटे रह जाएगा।
  • दिल्ली से ऋषिकेश: समय 5-6 घंटे से घटकर 2.5-3 घंटे होगा।
  • ऋषिकेश से कर्णप्रयाग: रेल यात्रा में केवल 2 से 2.5 घंटे लगेंगे।
  • कुल यात्रा: दिल्ली से बद्रीनाथ और केदारनाथ तक पहुंचने का समय घटकर लगभग 4.5-5 घंटे होने की संभावना है।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बताया कि यह परियोजना न केवल तीर्थयात्रियों के लिए आसान होगी, बल्कि इससे राज्य में पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, यह लाइन भारत-चीन सीमा पर सैनिकों की आवाजाही के लिए रणनीतिक रूप से भी बहुत महत्वपूर्ण है।