Delhi: राजधानी दिल्ली के मशहूर ‘द ललित’ होटल के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) के उस फैसले को सही माना है, जिसमें होटल का लाइसेंस रद्द करने और ₹1,063 करोड़
Delhi: राजधानी दिल्ली के मशहूर ‘द ललित’ होटल के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) के उस फैसले को सही माना है, जिसमें होटल का लाइसेंस रद्द करने और ₹1,063 करोड़ से ज्यादा के बकाया शुल्क की मांग की गई है। यह मामला अब एक बड़े कानूनी विवाद में बदल चुका है और होटल प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती है।
हाई कोर्ट ने NDMC के फैसले को क्यों माना सही?
दिल्ली हाई कोर्ट की खंडपीठ, जिसमें चीफ जस्टिस डी. के. उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला शामिल थे, ने अप्रैल 2026 में यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि भारत होटल्स लिमिटेड (जो द ललित होटल चलाता है) ने 1982 के लाइसेंस समझौते का उल्लंघन किया है। अदालत ने साफ किया कि सार्वजनिक जमीन से अधिकतम कमाई करना NDMC की जिम्मेदारी है, क्योंकि किसी भी तरह का नुकसान सीधे तौर पर करदाताओं पर बोझ डालता है, जो संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ है।
क्या है पूरा विवाद और कितनी है बकाया राशि?
यह विवाद बाराखंभा लेन की जमीन से जुड़ा है, जिसे 1973 में सरकार ने NDMC को दिया था और बाद में 1982 में भारत होटल्स के साथ 99 साल का समझौता हुआ था। NDMC ने 13 फरवरी 2020 को ₹1,063.74 करोड़ की बकाया राशि का नोटिस भेजा था और लाइसेंस खत्म करने की सूचना दी थी।
| विवरण |
जानकारी |
| बकाया राशि |
₹1,063.74 करोड़ |
| संबंधित संस्थाएं |
NDMC और भारत होटल्स लिमिटेड |
| लाइसेंस समझौता वर्ष |
22 अप्रैल 1982 |
| प्रारंभिक वार्षिक शुल्क |
₹1.45 करोड़ |
| L&DO की मांग |
₹162 करोड़ से अधिक संशोधित भू-राजस्व |
अब आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट के इस फैसले ने पहले के उस आदेश को पलट दिया है जिसने NDMC के नोटिस को रद्द कर दिया था। अब भारत होटल्स लिमिटेड के पास इस फैसले को चुनौती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प बचा है। अगर होटल प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं पाता है, तो उन्हें यह भारी-भरकम राशि चुकानी होगी या संपत्ति खाली करनी होगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
द ललित होटल पर कितना जुर्माना या बकाया है?
न्यू दिल्ली म्युनिसिपल काउंसिल (NDMC) ने भारत होटल्स लिमिटेड से ₹1,063.74 करोड़ के बकाया लाइसेंस शुल्क की मांग की है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने इस मामले में क्या आदेश दिया है?
हाई कोर्ट ने NDMC द्वारा लाइसेंस रद्द करने और बकाया राशि मांगने के फैसले को वैध माना है, क्योंकि होटल ने लाइसेंस डीड के नियमों का उल्लंघन किया था।