Delhi में किराएदार ने मकान मालिक के नाम पर लिए 18 करोड़ के लोन, जालसाज संजीव दीक्षित गिरफ्तार
Delhi: दिल्ली की एक महिला के साथ धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक किराएदार ने मकान मालिक के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके नाम पर करीब 18 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW)
Delhi: दिल्ली की एक महिला के साथ धोखाधड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। यहां एक किराएदार ने मकान मालिक के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उनके नाम पर करीब 18 करोड़ रुपये का लोन ले लिया। दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) ने इस मामले के मुख्य आरोपी संजीव दीक्षित को गिरफ्तार कर लिया है, जो पिछले नौ सालों से पुलिस की पकड़ से बाहर था।
यह पूरा मामला फरवरी 2013 से शुरू हुआ था। आरोपी संजीव दीक्षित, जिसे संजय शर्मा और संजीव गांधी के नाम से भी जाना जाता है, ने विवेक विहार इलाके में रहने वाली एक विधवा महिला उषा रानी सेठी को अपना निशाना बनाया। आरोपी ने अपने साथियों को किराएदार बनाकर घर में रखा ताकि वह प्रॉपर्टी के कागजात और अन्य जानकारियों तक पहुंच बना सके। इसके बाद एक फर्जी सेल डीड (बिक्री विलेख) तैयार की गई और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में एक दूसरी महिला को शिकायतकर्ता बनकर पेश किया गया।
इस फर्जीवाड़े के जरिए आरोपी ने अलग-अलग बैंकों से भारी भरकम कर्ज लिया। लोन की पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
| बैंक/सुविधा | लोन राशि | विवरण |
|---|---|---|
| Chinatrust Commercial Bank | 10 करोड़ रुपये | 4.75 करोड़ रुपये दिए गए |
| कैश क्रेडिट सुविधा | 5 करोड़ रुपये | अन्य बैंक |
| कैश क्रेडिट सुविधा | 3 करोड़ रुपये | अन्य बैंक |
| कार लोन | 70 लाख रुपये | अन्य बैंक |
पुलिस जांच में पता चला कि इन लोन खातों में से ज्यादातर बाद में NPA (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) बन गए। आरोपी ने इस पैसे को ठिकाने लगाने के लिए शेल कंपनियों और फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल किया।
EOW के एडिशनल कमिश्नर रवि कुमार सिंह ने बताया कि संजीव दीक्षित एक आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ अलग-अलग एजेंसियों ने 12 केस दर्ज कर रखे हैं। वह 2017 में यूपी पुलिस की गिरफ्त से फरार हो गया था और दिल्ली कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था। आखिरकार 25 जून 2026 को उसे तिहार जेल से गिरफ्तार किया गया, जहां वह किसी दूसरे मामले में पहले से ही बंद था।
पुलिस ने आम लोगों को सलाह दी है कि वे अपनी प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड की समय-समय पर जांच करते रहें ताकि किसी भी अनधिकृत लेनदेन का पता चल सके। साथ ही बैंकों से भी अपील की गई है कि वे लोन देने से पहले मालिकाना हक के दस्तावेजों और कर्ज लेने वाले व्यक्ति की कड़ी जांच करें।