Delhi के सरकारी कैंसर अस्पताल में 15 करोड़ की मशीन सालों से बंद, हाई कोर्ट ने जताई नाराजगी

Delhi: दिल्ली के इकलौते सरकारी कैंसर अस्पताल, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) में करोड़ों रुपये की मशीन बेकार पड़ी है। 15.42 करोड़ रुपये की PET साइक्लोट्रॉन मशीन सालों से बंद होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजग

Delhi: दिल्ली के इकलौते सरकारी कैंसर अस्पताल, दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (DSCI) में करोड़ों रुपये की मशीन बेकार पड़ी है। 15.42 करोड़ रुपये की PET साइक्लोट्रॉन मशीन सालों से बंद होने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने इसे सरकारी संसाधनों की भारी बर्बादी बताया है।

यह मशीन सितंबर 2017 में लगाई गई थी, लेकिन अप्रैल 2022 से यह अनुपयोगी है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, ट्रेंड स्टाफ की कमी और जरूरी मंजूरियां न मिलने की वजह से मशीन चालू नहीं हो पाई। हद तो यह है कि फरवरी 2024 में इसका लाइसेंस खत्म हो गया और उसे रिन्यू भी नहीं कराया गया।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की बेंच ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई है। कोर्ट ने अब दिल्ली सरकार के सभी अस्पतालों में ऐसे बेकार पड़े मेडिकल उपकरणों का ऑडिट करने का आदेश दिया है। हर अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट को हलफनामा देना होगा कि मशीन क्यों खरीदी गई, उसकी कीमत क्या थी और वह बंद क्यों है।

मशीनों के बंद होने का सबसे बुरा असर गरीब मरीजों पर पड़ रहा है। जांच के लिए मरीजों को महीनों का इंतजार करना पड़ रहा है। एक मामले में मरीज को जुलाई में जांच लिखी गई, लेकिन अल्ट्रासाउंड की तारीख अगस्त और सीटी स्कैन की सितंबर की मिली। मजबूरी में परिवार को प्राइवेट सेंटर से महंगी जांच करानी पड़ी।

समस्या वर्तमान स्थिति
PET साइक्लोट्रॉन मशीन अप्रैल 2022 से बंद
रेडियोथेरेपी मशीनें 3 में से केवल 1 चालू
जांच की तारीखें सीटी स्कैन के लिए सितंबर तक का इंतजार
रिपोर्ट में देरी 1 से 2 महीने का समय लग रहा है

अस्पताल में डॉक्टरों और दवाइयों की भी कमी बताई जा रही है। रेडियोथेरेपी के कुछ सत्रों के लिए तो मरीजों को अगले साल जनवरी-फरवरी तक की तारीखें मिल रही हैं। कोर्ट ने डीएससीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी को अगली सुनवाई में पेश होने का निर्देश दिया है।