Delhi में 18 साल के बेटे ने पिता को दी किडनी, ब्लड ग्रुप अलग होने के बाद भी सफल हुआ ऑपरेशन
Delhi: दिल्ली के एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में एक बेटे ने अपने पिता की जान बचाने के लिए अपनी किडनी दान की है। 18 साल के अली रजा ने अपने पिता आबिद रजा को किडनी दी, जिससे उनकी जान बच गई। खास बात यह रही कि पिता और बेटे दो
Delhi: दिल्ली के एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में एक बेटे ने अपने पिता की जान बचाने के लिए अपनी किडनी दान की है। 18 साल के अली रजा ने अपने पिता आबिद रजा को किडनी दी, जिससे उनकी जान बच गई। खास बात यह रही कि पिता और बेटे दोनों का ब्लड ग्रुप अलग था, लेकिन डॉक्टरों ने नई तकनीक का इस्तेमाल कर इस मुश्किल सर्जरी को कामयाब बनाया।
आबिद रजा दिल्ली के एक बिजनेसमैन हैं और वह एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी से जूझ रहे थे। इस बीमारी की वजह से उनकी किडनी तेजी से खराब हो गई थी और उनकी हालत काफी गंभीर हो गई थी। उनके बेटे अली रजा ने, जिन्होंने हाल ही में अपनी 12वीं की परीक्षा में 92% अंक हासिल किए हैं, अपने पिता की मदद के लिए किडनी देने का फैसला किया।
अली रजा का ब्लड ग्रुप B+ था जबकि उनके पिता का O+ था। इस अंतर को दूर करने के लिए Max Super Speciality Hospital, Patparganj के डॉक्टरों ने ABO-incompatible ट्रांसप्लांट तकनीक का इस्तेमाल किया। इस प्रक्रिया में विशेष इम्यूनोलॉजिकल तैयारी और प्लाज्माफेरेसिस जैसे तरीकों का प्रयोग किया गया ताकि शरीर नई किडनी को स्वीकार कर सके।
इस पूरी सर्जरी की टीम का नेतृत्व Urology और Kidney Transplant Surgery के सीनियर डायरेक्टर डॉ. परेश जैन ने किया, जबकि नेफ्रोलॉजी के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. रवि कुमार सिंह भी टीम का हिस्सा थे। डॉ. परेश जैन ने बताया कि इतनी कम उम्र के लड़के द्वारा किडनी दान करना उसकी हिम्मत और परिपक्वता को दर्शाता है। वहीं डॉ. रवि कुमार सिंह ने कहा कि आधुनिक प्रोटोकॉल की मदद से ब्लड ग्रुप के अंतर जैसी बड़ी बाधा को पार किया गया।
ऑपरेशन के बाद पिता की सेहत में तेजी से सुधार हुआ और उन्हें एक हफ्ते के भीतर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बेटे अली को सर्जरी के चार दिन बाद ही घर भेज दिया गया। यह पूरी घटना जून में फादर्स डे से ठीक पहले सामने आई, जिसने पिता और पुत्र के रिश्ते की एक मिसाल पेश की है।