Delhi: शालीमार बाग गांव के रहने वालों के लिए एक बड़ी खबर आई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गांव की मेन रोड को 30 मीटर चौड़ा करने के लिए 143 मकानों को तोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अवैध तरीके से बनी इन इमारतों को
Delhi: शालीमार बाग गांव के रहने वालों के लिए एक बड़ी खबर आई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने गांव की मेन रोड को 30 मीटर चौड़ा करने के लिए 143 मकानों को तोड़ने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कहा है कि अवैध तरीके से बनी इन इमारतों को हटाया जाए ताकि सड़क चौड़ी हो सके और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें।
मकान खाली करने की समय सीमा और नियम क्या हैं?
दिल्ली हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल 2026 को अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने घर मालिकों को 30 मई 2026 तक अपना सामान समेटने और घर खाली करने का समय दिया है। इस तारीख के बाद प्रशासन इन मकानों को गिराने की कार्रवाई शुरू कर सकता है। इससे पहले 21 जनवरी 2026 को रोड नंबर 320 को चौड़ा करने के लिए पब्लिक नोटिस भी जारी किया गया था।
कोर्ट ने यह फैसला क्यों लिया?
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि सार्वजनिक जमीन पर कब्जा करने वालों के निजी हित से ज्यादा जरूरी जनता का हित है। सड़क चौड़ी होने से इलाके में मेडिकल केयर, शिक्षा और फायर सेफ्टी जैसी जरूरी सेवाओं के लिए एम्बुलेंस और फायर ब्रिगेड की गाड़ियां आसानी से पहुंच सकेंगी। DDA के मुताबिक, यह जमीन 1960 के दशक में ली गई थी और 1980-81 में इसके अवार्ड पास हो गए थे, लेकिन फिर भी यहां अवैध निर्माण हुए।
क्या प्रभावित लोगों को कोई मुआवजा मिलेगा?
मकान टूटने से परेशान लोगों के लिए कोर्ट ने एक राहत की बात कही है। कोर्ट ने दिल्ली सरकार (GNCTD) को निर्देश दिया है कि जो लोग प्रभावित हुए हैं, उनके मुआवजे (ex-gratia compensation) की मांग पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए। फिलहाल, पीडब्ल्यूडी (PWD) को सड़क चौड़ी करने के लिए इस जमीन की जरूरत है।