Delhi के 774 स्कूलों में मिलीं सुरक्षा खामियां, प्राइवेट स्कूलों की हालत सबसे खराब

Delhi: राजधानी के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। शिक्षा विभाग की जांच में 1,677 स्कूलों में से 774 स्कूलों में सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाई गई हैं। सबसे ज्यादा लापरवाही प्राइवेट स्कूलों में द

Delhi: राजधानी के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है। शिक्षा विभाग की जांच में 1,677 स्कूलों में से 774 स्कूलों में सुरक्षा से जुड़ी कमियां पाई गई हैं। सबसे ज्यादा लापरवाही प्राइवेट स्कूलों में देखी गई है, जिसके बाद अब प्रशासन ने इन स्कूलों पर कड़ी नजर रखनी शुरू कर दी है।

यह पूरी जांच 13 जुलाई से 24 जुलाई 2026 के बीच की गई। यह कदम लेफ्टिनेंट गवर्नर Taranjit Singh Sandhu और मुख्यमंत्री Rekha Gupta की 6 जुलाई की मीटिंग के बाद उठाया गया था। जुलाई महीने को ‘Child Protection Month’ के तौर पर मनाया जा रहा है, जिसका मकसद दिल्ली के हर स्कूल में बच्चों के लिए सुरक्षित माहौल तैयार करना है। शिक्षा मंत्री Ashish Sood ने साफ कहा है कि बच्चों की सुरक्षा किसी भी एकेडमिक रिपोर्ट से ज्यादा जरूरी है।

जांच के लिए NCPCR और DCPCR की गाइडलाइंस के आधार पर एक ‘Student Safety Checklist’ का इस्तेमाल किया गया। स्कूलों को 12 जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं, जिनमें संवेदनशील जगहों पर CCTV कैमरे लगाना, स्कूल बसों की सुरक्षा जांच करना और जुलाई के अंत तक ‘Child Protection Committee’ बनाना शामिल है। नियमों के मुताबिक, CCTV फुटेज को कम से कम 30 दिनों तक संभाल कर रखना होगा। साथ ही, यौन शोषण से जुड़े किसी भी मामले की जानकारी बिना किसी आंतरिक जांच के तुरंत रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।

सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए 25 जुलाई को शहर भर में ‘अभिभावक शिक्षक संवाद’ (PTM) भी आयोजित किया गया। इसमें माता-पिता और शिक्षकों ने POCSO एक्ट, गुड टच-बैड टच और ऑनलाइन सेफ्टी जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की। प्रशासन का कहना है कि यह अभियान तब तक चलेगा जब तक दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों की जांच पूरी नहीं हो जाती। जिन स्कूलों में कमियां मिली हैं, उन्हें सुधार करने के लिए सख्त निगरानी में रखा गया है ताकि यह सिर्फ एक कागजी कार्रवाई बनकर न रह जाए।