Delhi: दिल्ली के स्कूलों में अब पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी छात्रों के कंधों पर होगी। Directorate of Education ने साल 2026-27 के सत्र के लिए एक खास प्रोग्राम शुरू किया है। इसका मकसद बच्चों को सिर्फ किताबों से नहीं, ब
Delhi: दिल्ली के स्कूलों में अब पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी छात्रों के कंधों पर होगी। Directorate of Education ने साल 2026-27 के सत्र के लिए एक खास प्रोग्राम शुरू किया है। इसका मकसद बच्चों को सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि असल जिंदगी में प्रदूषण से लड़ना सिखाना है। अब शहर के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को इस मुहिम से जुड़ना होगा।
स्कूलों में क्या-क्या बदलाव होंगे और क्या नियम हैं?
शिक्षा निदेशालय के साइंस ब्रांच ने इसके लिए सख्त निर्देश दिए हैं। स्कूलों को अपनी कैंपस के अंदर ही कुछ जरूरी कदम उठाने होंगे जैसे:
- गीले और सूखे कचरे के लिए अलग-अलग कूड़ेदान रखना।
- बिजली की खपत कम करना और सामान को दोबारा इस्तेमाल (Reuse) करने को बढ़ावा देना।
- कैंपस में कचरा जलाने और गंदगी फैलाने पर रोक लगाना।
- हर दिन मॉर्निंग असेंबली में पर्यावरण से जुड़ा एक संदेश देना।
पूरे साल कौन सी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी?
यह प्रोग्राम महीने दर महीने अलग-अलग विषयों पर चलेगा। अप्रैल 2026 से शुरू हुए इस अभियान की योजना कुछ इस तरह है:
| समय/विषय |
मुख्य गतिविधि |
| शुरुआती महीने |
सिंगल यूज प्लास्टिक के खिलाफ अभियान |
| पूरे साल |
पानी बचाना और धूल नियंत्रण (Dust Control) |
| सर्दियों का समय |
हवा और शोर प्रदूषण (Air and Noise Pollution) पर फोकस |
सभी स्कूलों को हर महीने अपनी एक्टिविटी की रिपोर्ट और फोटो जमा करनी होगी। एक अधिकारी ने बताया कि छात्र अब सिर्फ दर्शक नहीं रहेंगे, बल्कि बदलाव का हिस्सा बनेंगे।