Delhi के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा के लिए बनेंगे स्पेशल पैनल, DCPCR में 3 साल से खाली पड़े हैं 7 पद

Delhi: राजधानी के स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए सरकार अब बड़े बदलाव करने जा रही है। दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों में 31 जुलाई 2026 तक चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं दूसरी तर

Delhi: राजधानी के स्कूलों में बच्चों को सुरक्षित माहौल देने के लिए सरकार अब बड़े बदलाव करने जा रही है। दिल्ली के सभी 5,633 स्कूलों में 31 जुलाई 2026 तक चाइल्ड प्रोटेक्शन कमेटी बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ, बच्चों के अधिकारों की निगरानी करने वाली संस्था DCPCR में पिछले तीन साल से कई पद खाली पड़े हैं, जिस पर हाई कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है।

लेफ्टिनेंट गवर्नर तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक हाई-लेवल मीटिंग में साफ किया कि बच्चों की सुरक्षा के मामले में कोई लापरवाही नहीं चलेगी। अब हर स्कूल में एक कमेटी होगी जिसकी कमान प्रिंसिपल के हाथ में होगी। इस कमेटी में टीचर, पेरेंट्स, काउंसलर और एक छात्र का प्रतिनिधि भी शामिल होगा। यह टीम हर तीन महीने में मीटिंग करेगी ताकि बुलिंग, हैरेसमेंट और साइबर क्राइम जैसी शिकायतों का निपटारा किया जा सके।

स्कूलों के लिए सुरक्षा के कड़े नियम जारी किए गए हैं। अब स्कूलों को सभी स्टाफ का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन करना होगा। सीसीटीवी फुटेज को कम से कम 30 दिनों तक संभाल कर रखना होगा और कॉरिडोर में अच्छी रोशनी का इंतजाम करना होगा। साथ ही, स्कूल बसों का रंग पीला होना चाहिए और उनमें जीपीएस के साथ दो अग्निशामक यंत्र होने जरूरी हैं। अगर किसी स्टाफ पर यौन अपराध का शक होता है, तो स्कूल को बिना किसी अंदरूनी जांच के तुरंत पुलिस को खबर करनी होगी, वरना स्कूल हेड को जेल भी हो सकती है।

इस पूरी व्यवस्था के बीच दिल्ली कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (DCPCR) की हालत खराब है। जुलाई 2023 से इसका चेयरपर्सन पद खाली है और कुल 7 पद भरे जाने बाकी हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने फरवरी 2026 में सरकार की इस सुस्ती पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि अगर इसी कछुए की रफ्तार से काम चलेगा तो इस एक्ट को ही खत्म कर देना चाहिए। कोर्ट ने इन पदों को भरने के लिए अप्रैल 2026 की डेडलाइन दी थी, लेकिन अब तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं।

बच्चों की सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए दिल्ली पुलिस भी अब एक्टिव होगी। हर जिले में एक एडिशनल डीसीपी को नोडल ऑफिसर बनाया गया है। जुलाई के अंत तक सभी शिक्षकों और स्टाफ को POCSO एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की ट्रेनिंग दी जाएगी ताकि वे बच्चों के साथ होने वाले अपराधों पर सही तरीके से एक्शन ले सकें। स्कूलों में अब बिना किसी डर के शिकायत करने के लिए सीसीटीवी से दूर गोपनीय शिकायत बॉक्स भी लगाए जाएंगे।