Delhi: दिल्ली के निजी स्कूलों में ज्यादा वसूली गई फीस को वापस पाने के लिए अभिभावकों की लड़ाई तेज हो गई है। दिल्ली अभिभावक संघ (DPA) ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से इस मामले में तुरंत दखल देने की म
Delhi: दिल्ली के निजी स्कूलों में ज्यादा वसूली गई फीस को वापस पाने के लिए अभिभावकों की लड़ाई तेज हो गई है। दिल्ली अभिभावक संघ (DPA) ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है। संघ का कहना है कि स्कूलों द्वारा 1,317 करोड़ रुपये से ज्यादा की फीस बकाया है, जो अभिभावकों को लौटाई जानी चाहिए।
फीस वापसी के लिए अभिभावकों की क्या मांगें हैं?
DPA ने सरकार को ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि अप्रैल 2020 तक की समय सीमा के अंदर आने वाले सभी स्कूलों की एक अंतिम सूची जारी की जाए। उन्होंने सरकार से कहा है कि स्कूल-वार फीस वापसी और ब्याज की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए। साथ ही, अभिभावकों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने की मांग की गई है ताकि वे आसानी से अपना दावा पेश कर सकें। संघ चाहता है कि सरकार उन स्कूलों की अलग लिस्ट दे जिन्होंने कोर्ट में चुनौती दी है और जिन्होंने नहीं दी है।
कोर्ट में सुनवाई और सरकार के कड़े निर्देश
इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 8 मई, 2026 को दिल्ली उच्च न्यायालय में होनी है। DPA ने सरकार से आग्रह किया है कि वह अदालत में बच्चों और अभिभावकों के हितों का मजबूती से पक्ष रखे। दूसरी तरफ, शिक्षा निदेशालय (DoE) ने 1 और 2 मई, 2026 को सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सभी निजी स्कूल केवल मासिक आधार पर ही फीस वसूलें। स्कूलों को आदेश दिया गया है कि वे अभिभावकों को एक महीने से ज्यादा की फीस एक साथ जमा करने के लिए मजबूर नहीं कर सकते।
नियम तोड़ने वाले स्कूलों पर क्या होगी कार्रवाई?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने पहले ही साफ कर दिया है कि फीस नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर जुर्माना लगाया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने चेतावनी दी है कि यदि स्कूल मासिक फीस के नियम को नहीं मानते हैं, तो दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973 के तहत उनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। गंभीर मामलों में स्कूल प्रबंधन का अधिग्रहण कर उसे सरकारी नियंत्रण में भी लिया जा सकता है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
दिल्ली के निजी स्कूलों में कितनी फीस वापस होनी है?
दिल्ली अभिभावक संघ (DPA) के दावे के अनुसार, निजी स्कूलों द्वारा 1,317 करोड़ रुपये से अधिक की फीस बकाया है, जिसे अभिभावकों को वापस किया जाना है।
स्कूल फीस को लेकर शिक्षा निदेशालय ने क्या नया नियम जारी किया है?
शिक्षा निदेशालय ने निर्देश दिया है कि सभी निजी स्कूल केवल मासिक आधार पर फीस वसूलेंगे। स्कूल अभिभावकों को एक बार में एक महीने से अधिक की फीस जमा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकते।