Delhi के Sarojini Nagar हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए 1,091 पेड़ों की कटाई को मंजूरी, सरकार ने दी हरी झंडी

Delhi: दिल्ली सरकार ने सरोजिनी नगर में जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) कॉलोनी के पुनर्विकास प्रोजेक्ट के लिए 1,091 पेड़ों को काटने या उन्हें दूसरी जगह लगाने की अंतिम मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब NBCC (India)

Delhi: दिल्ली सरकार ने सरोजिनी नगर में जनरल पूल रेजिडेंशियल एकोमोडेशन (GPRA) कॉलोनी के पुनर्विकास प्रोजेक्ट के लिए 1,091 पेड़ों को काटने या उन्हें दूसरी जगह लगाने की अंतिम मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब NBCC (India) Limited इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर सकेगी। यह मंजूरी दिल्ली सरकार के वन और वन्यजीव विभाग ने 19 जून 2026 को दी थी।

इस पूरे मामले में पेड़ों की संख्या को कम करने के लिए कई स्तरों पर जांच हुई। शुरुआत में 1,218 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव था, जिसे साइट निरीक्षण के बाद ट्री ऑफिसर ने घटाकर 1,170 कर दिया था। इसके बाद 11 मई 2026 को केंद्रीय सशक्त समिति (CEC) के आदेश के बाद 79 और पेड़ों को बचा लिया गया, जिससे अंतिम संख्या 1,091 रह गई।

नियमों के मुताबिक, दिल्ली प्रिजर्वेशन ऑफ ट्रीज एक्ट 1994 के तहत सार्वजनिक हित में ऐसी छूट दी जा सकती है। सरकार ने शर्त रखी है कि हर एक पेड़ के बदले दस नए पौधे लगाए जाएंगे। इसके लिए द्वारका के भारत वंदना पार्क में जगह तय की गई है, जहां 10,910 पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही 1,049 पेड़ों को दूसरी जगह ट्रांसप्लांट किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट के लिए 6.2 करोड़ रुपये से ज्यादा की सिक्योरिटी राशि जमा कराई गई है, जो पौधों के जीवित रहने की गारंटी और सात साल के रखरखाव से जुड़ी है। अधिकारियों ने बताया कि यह एक लंबी प्रक्रिया थी जिसमें हर पेड़ की मैपिंग की गई ताकि कम से कम नुकसान हो।

हालांकि, इस प्रोजेक्ट को लेकर पहले विरोध भी हुआ था। पर्यावरण वकील आदित्य प्रसाद और कार्यकर्ता पद्मवती द्विवेदी ने इसे दिल्ली के प्रदूषण स्तर के लिए खतरनाक बताया था। साल 2018 में तत्कालीन केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि कॉलोनियों के पुनर्विकास में पेड़ों की कटाई नहीं होगी और डिजाइन में बदलाव किए जाएंगे। अब नए नियमों के तहत हर पेड़ की जियो-टैगिंग होगी और फोटो रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। साथ ही यह निर्देश दिया गया है कि जब तक पक्षियों के घोंसले या जानवरों के बिल प्राकृतिक रूप से खाली नहीं हो जाते, उन्हें परेशान नहीं किया जाएगा।