Delhi: राजधानी के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां अस्पताल प्रशासन ने एक जीवित मरीज को मृत घोषित कर दिया और उसकी मृत्यु रिपोर्ट जारी कर दी। इस घटना के बाद मरीज के परिवार
Delhi: राजधानी के डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां अस्पताल प्रशासन ने एक जीवित मरीज को मृत घोषित कर दिया और उसकी मृत्यु रिपोर्ट जारी कर दी। इस घटना के बाद मरीज के परिवार में हड़कंप मच गया है और अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
क्या है पूरा मामला और कैसे हुई गलती
अशोक विहार/अंकुर विहार निवासी 51 वर्षीय जितेंद्र कुकरेती को कुत्तों के हमले के बाद अप्रैल 2026 में RML अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल के रिकॉर्ड में 23 अप्रैल 2026 को उनकी मृत्यु दर्ज कर ली गई। डिस्चार्ज के समय अस्पताल ने उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र और सारांश सौंप दिया, जबकि मरीज जीवित थे। उनके ममेरे भाई ओम प्रकाश बडोला ने इस गंभीर लापरवाही को सबके सामने लाया है।
अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की प्रतिक्रिया
इस मामले पर RML अस्पताल प्रशासन ने अब तक चुप्पी साधी हुई है। मेडिकल सुप्रिटेंडेंट डॉ. विवेक दीवान और जनसंपर्क विभाग ने इस बारे में कोई जवाब नहीं दिया है। दूसरी ओर, दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की निगरानी के लिए चार विशेष टीमें बनाई हैं। इन टीमों का नेतृत्व विशेष सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे और वे हर हफ्ते 7-8 अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे ताकि ऐसी गलतियां दोबारा न हों।
मरीज के परिवार के आरोप और सुरक्षा पर सवाल
परिजनों का कहना है कि यह सिर्फ एक तकनीकी गलती नहीं है, बल्कि यह चिकित्सीय और प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। अस्पताल ने बिना किसी भौतिक सत्यापन या जांच के इतना संवेदनशील दस्तावेज जारी कर दिया। इस घटना ने दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और रिकॉर्ड रखने के तरीके पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
RML अस्पताल में किस मरीज की डेथ रिपोर्ट गलती से जारी हुई
दिल्ली के अशोक विहार/अंकुर विहार निवासी 51 वर्षीय जितेंद्र कुकरेती की डेथ रिपोर्ट गलती से जारी हुई, जिन्हें कुत्तों के हमले के बाद भर्ती कराया गया था।
स्वास्थ्य विभाग ने इस लापरवाही के बाद क्या कदम उठाए हैं
स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की निगरानी के लिए चार टीमें बनाई हैं, जिनका नेतृत्व विशेष सचिव स्तर के अधिकारी करेंगे और वे नियमित रूप से अस्पतालों का निरीक्षण करेंगे।