Delhi: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने चार आरोपियों को बरी कर दिया है, जिन पर ऑटो-रिक्शा जलाने और दुकान में तोड़फोड़ करने का आरोप था
Delhi: उत्तर-पूर्वी दिल्ली में साल 2020 में हुए दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने चार आरोपियों को बरी कर दिया है, जिन पर ऑटो-रिक्शा जलाने और दुकान में तोड़फोड़ करने का आरोप था। कोर्ट ने इस मामले में पुलिस की जांच और गवाहों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
कौन थे बरी हुए आरोपी और क्या थे आरोप
अदालत ने सुमित कुमार, अनुज, राहुल और सचिन को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। इन चारों पर करावल नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR के तहत मामला चल रहा था। उन पर IPC की धारा 147, 148, 149, 188, 427, 454 और 436 के तहत केस दर्ज था। उन पर आरोप था कि उन्होंने एक ऑटो-रिक्शा को आग के हवाले किया और एक दुकान में तोड़फोड़ की थी।
कोर्ट ने पुलिस के गवाहों पर क्यों उठाए सवाल
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह ने 19 मई, 2026 को यह आदेश दिया। जज ने साफ कहा कि पुलिस के गवाहों (PW6 और PW7) की बातों पर भरोसा करना खतरनाक होगा क्योंकि उनकी गवाही विश्वसनीय नहीं थी। कोर्ट ने पाया कि गवाहों की बातें जांच रिकॉर्ड से मेल नहीं खा रही थीं और वे गलत साबित हुईं। इसके अलावा, शिकायतकर्ता वाजिद कोर्ट में पेश नहीं हो सका और दूसरे शिकायतकर्ता शमशाद आरोपियों की पहचान नहीं कर पाया।
फैसले का मुख्य आधार क्या रहा
अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपना मामला उचित संदेह से परे साबित नहीं कर पाया। कोर्ट के मुताबिक, जब मुख्य गवाह और सबूत पुख्ता नहीं होते, तो किसी को सजा नहीं दी जा सकती। इसी आधार पर चारों आरोपियों को रिहा करने का आदेश जारी किया गया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
कड़कड़डूमा कोर्ट ने किन लोगों को बरी किया है?
कोर्ट ने सुमित कुमार, अनुज, राहुल और सचिन नाम के चार व्यक्तियों को बरी किया है, जिन पर 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान तोड़फोड़ और आगजनी का आरोप था।
कोर्ट ने पुलिस गवाहों के बारे में क्या टिप्पणी की?
जज परवीन सिंह ने कहा कि पुलिस के गवाहों की गवाही विश्वसनीय नहीं थी और उन पर भरोसा करना खतरनाक होगा क्योंकि उनकी बातें रिकॉर्ड से गलत साबित हुईं।