Delhi Riots Case: कड़कडूमा कोर्ट में दिल्ली पुलिस की अंतिम दलीलें पूरी, उमर खालिद और शरजील इमाम समेत कई आरोपी दायरे में

Delhi: उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के 2020 के मामले में कानूनी कार्यवाही अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। कड़कडूमा कोर्ट ने सोमवार, 13 जुलाई 2026 को इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने (framing of charges) के लिए दिल्ली

Delhi: उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों के 2020 के मामले में कानूनी कार्यवाही अब अहम मोड़ पर पहुंच गई है। कड़कडूमा कोर्ट ने सोमवार, 13 जुलाई 2026 को इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने (framing of charges) के लिए दिल्ली पुलिस की अंतिम दलीलें सुनीं। इस बड़ी साजिश के मामले में उमर खालिद, शरजील इमाम, Tahir Hussain, देवंगना कलिता और नताशा नरवाल जैसे कई नाम शामिल हैं।

इसी दिन एक और बड़ा फैसला सामने आया जिसमें पूर्व AAP पार्षद Tahir Hussain और उनके साथियों को IB ऑफिसर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी करार दिया गया। कोर्ट ने हुसैन को हत्या और दंगे के अपराध के लिए जिम्मेदार पाया, हालांकि उन पर लगी आपराधिक साजिश का आरोप हटा दिया गया। उनके साथ नाजिम, काशिम, अनस और जावेद को भी हत्या और अपहरण जैसे गंभीर आरोपों में सजा सुनाई गई, जबकि छह अन्य लोगों को बरी कर दिया गया। अब कोर्ट यह तय करेगा कि उन्हें कितनी सजा दी जाए।

इस केस से जुड़ी अन्य जानकारियों की बात करें तो 4 जुलाई 2026 को कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। जज समीर बाजपेई ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का हवाला देते हुए कहा कि आरोपी अब तभी जमानत के लिए अर्जी दे सकते हैं जब संरक्षित गवाहों की जांच पूरी हो जाए या सुप्रीम कोर्ट के आदेश को एक साल बीत जाए।

इससे पहले 5 जून 2026 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उस रोक को हटा लिया था जिसने ट्रायल कोर्ट को आरोप तय करने के अंतिम फैसले से रोका था। अब कड़कडूमा कोर्ट इस मामले में अपना फैसला सुनाने के लिए स्वतंत्र है। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपियों पर UAPA जैसे कड़े कानून लगाए हैं। पुलिस का यह भी कहना है कि आरोपी आधारहीन आवेदन देकर मुकदमे में देरी कर रहे हैं, जबकि कोर्ट ने भी बचाव पक्ष के वकीलों के बीच तालमेल की कमी के कारण होने वाली देरी पर नाराजगी जताई थी।