Delhi: दिल्ली के द्वारका स्थित HCMCT Manipal Hospitals में एक 85 साल के रिटायर्ड स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने अपनी मृत्यु के बाद अंगदान कर मानवता की मिसाल पेश की है। अधिकारी को गंभीर स्ट्रोक आया था, जिसके बाद उन्हें अस्
Delhi: दिल्ली के द्वारका स्थित HCMCT Manipal Hospitals में एक 85 साल के रिटायर्ड स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी ने अपनी मृत्यु के बाद अंगदान कर मानवता की मिसाल पेश की है। अधिकारी को गंभीर स्ट्रोक आया था, जिसके बाद उन्हें अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बाद भी उनकी हालत नहीं सुधरी और 3 जून 2026 को उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया गया, जिसके बाद उनके परिवार ने अंगदान का फैसला लिया।
अंगदान से किसे मिला फायदा और क्या हुआ प्रोसेस
रिटायर्ड अधिकारी के परिवार की सहमति के बाद उनके लीवर और कॉर्निया (आंखों की पुतली) का दान किया गया। उनका लीवर एक 68 साल के मरीज को ट्रांसप्लांट किया गया, जिससे उस व्यक्ति को नया जीवन मिला। वहीं, कॉर्निया को Nirmaya Eye Bank भेजा गया ताकि अन्य जरूरतमंद मरीजों की रोशनी वापस लौट सके। अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि इतनी अधिक उम्र में भी अंगदान संभव है, बशर्ते अंग स्वस्थ स्थिति में हों।
भारत में अंगदान की स्थिति और नए नियम
NOTTO के डायरेक्टर डॉ. अनिल कुमार के मुताबिक, भारत में करीब 94,000 मरीज अंगों के इंतजार में हैं और हर साल लगभग दो लाख नए किडनी मरीज जुड़ते हैं। इस कमी को दूर करने के लिए सरकार अब नए दिशा-निर्देश तैयार कर रही है। इसमें ‘Donation after Circulatory Death’ (DCD) को शामिल करने पर विचार हो रहा है, जिससे अब केवल ब्रेन डेड ही नहीं, बल्कि दिल धड़कना बंद होने के बाद भी कुछ अंगों का दान संभव हो सकेगा।
अंगदान के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया क्या है
भारत में ‘Transplantation of Human Organs and Tissues Act (THOTA), 1994’ के तहत अंगदान की प्रक्रिया चलती है। ब्रेन डेड व्यक्ति के अंगों को निकालने के लिए परिवार की सहमति अनिवार्य होती है। इसके साथ ही, अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर और एक स्वतंत्र विशेषज्ञ को ब्रेन डेड होने की पुष्टि करनी पड़ती है। कानूनन अंगों की खरीद-बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या अधिक उम्र के लोग भी अंगदान कर सकते हैं?
हाँ, जैसा कि इस मामले में 85 वर्षीय अधिकारी ने किया। डॉ. (कर्नल) अवनीश सेठ के अनुसार, उम्र से ज्यादा अंगों की सेहत और उनके काम करने की क्षमता मायने रखती है।
भारत में अंगदान के लिए वर्तमान में क्या नियम हैं?
THOTA 1994 एक्ट के तहत परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्ड द्वारा ब्रेन डेड होने का सर्टिफिकेट जरूरी है। वर्तमान में ब्रेन डेड होने पर अंगदान होता है, लेकिन सरकार अब DCD (दिल रुकने के बाद दान) के नियम ला रही है।