Delhi में भीषण गर्मी को मानवाधिकार का मुद्दा बनाने की मांग, NHRC को सौंपी गई ‘हीट रजिस्ट्रियां’

Delhi: दिल्ली के आम नागरिकों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने मांग की है कि अत्यधिक गर्मी को एक मानवाधिकार का मुद्दा घोषित किया जाए। इस मांग

Delhi: दिल्ली के आम नागरिकों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने मांग की है कि अत्यधिक गर्मी को एक मानवाधिकार का मुद्दा घोषित किया जाए। इस मांग के साथ लोगों ने आयोग को ‘हीट रजिस्ट्रियां’ सौंपी हैं, जिनमें यह दर्ज है कि भीषण गर्मी का उनकी सेहत, कमाई और गरिमा पर क्या असर पड़ा है।

यह पूरी मुहिम Greenpeace India के ‘Delhi Rising’ अभियान का हिस्सा है। 14 जुलाई 2026 को स्ट्रीट वेंडर्स, गिग वर्कर्स और सुंदर नगरी, सीआर पार्क, द्वारका और जामिया नगर जैसे इलाकों के निवासियों ने NHRC को पत्र और सबूत सौंपे। ये लोग मई 2026 से ही हर हफ्ते अपनी तकलीफों को हीट रजिस्ट्रियों में लिख रहे थे।

NHRC ने भी इस मुद्दे की गंभीरता को समझा है। आयोग ने 4 अप्रैल 2026 को दिल्ली सरकार और 21 राज्यों को निर्देश दिए थे कि वे बुजुर्गों, बच्चों, बेघर लोगों और बाहर काम करने वाले मजदूरों को गर्मी से बचाने के लिए पहले से तैयारी रखें। इसके बाद 13 जुलाई 2026 को NHRC ने फिर से इन राज्यों के मुख्य सचिवों से कहा कि वे NDMA की गाइडलाइन्स के हिसाब से राहत उपाय लागू करें और उसकी रिपोर्ट दें।

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस V. Ramasubramanian और महासचिव भारत लाल ने माना कि बढ़ता शहरीकरण, पानी के स्रोतों का खत्म होना और जंगलों की कमी की वजह से तापमान बढ़ रहा है। उन्होंने इसे एक गंभीर मानवाधिकार मुद्दा बताया है। साथ ही, 2019 से 2023 के बीच भारत में गर्मी से हुई 3,712 मौतों के आंकड़ों का भी हवाला दिया गया है।

दिल्ली के निवासियों और Greenpeace India ने मांग की है कि गर्मी से निपटने के लिए सरकारी फंड दिया जाए और 16वें वित्त आयोग की उस सिफारिश को लागू किया जाए, जिसमें हीटवेव को एक ‘राष्ट्रीय आपदा’ घोषित करने की बात कही गई थी। इससे बचाव और राहत कार्यों के लिए अलग से बजट मिल सकेगा। आयोग ने सुझाव दिया है कि मजदूरों के काम करने के घंटों में बदलाव किया जाए और गर्मी से बीमार लोगों के इलाज के लिए स्टैंडर्ड नियम बनाए जाएं।