Delhi: लाल किले (Red Fort) में हुए ब्लास्ट के पीड़ितों और उनके परिवारों ने सरकार से मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की है। पीड़ितों ने इस संबंध में सरकार को पत्र लिखकर अपनी परेशानी बताई है। एक NGO भी इस मुहिम में उनके साथ
Delhi: लाल किले (Red Fort) में हुए ब्लास्ट के पीड़ितों और उनके परिवारों ने सरकार से मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग की है। पीड़ितों ने इस संबंध में सरकार को पत्र लिखकर अपनी परेशानी बताई है। एक NGO भी इस मुहिम में उनके साथ है और केंद्र व दिल्ली सरकार से मदद की अपील कर रहा है।
मुआवजे की वर्तमान राशि क्या है?
दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने ब्लास्ट पीड़ितों के लिए एक राहत पैकेज का ऐलान किया था। इसके तहत अलग-अलग श्रेणियों में पैसे तय किए गए थे:
- मृतकों के परिवार के लिए: ₹10 लाख
- स्थायी विकलांगता वाले लोगों के लिए: ₹5 लाख
- गंभीर रूप से घायल लोगों के लिए: ₹2 लाख
- मामूली चोट वाले पीड़ितों के लिए: ₹20,000
सरकार ने घायलों के बेहतर और गुणवत्तापूर्ण इलाज का जिम्मा भी लिया था। इनकम टैक्स एक्ट की धारा 10(BC) के तहत यह राहत राशि टैक्स फ्री रखी गई है।
पीड़ितों को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?
कई पीड़ित अभी भी अपने हक के पैसे का इंतजार कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, भवानी शंकर शर्मा नाम के एक टैक्सी ड्राइवर की गाड़ी ब्लास्ट में तबाह हो गई, लेकिन उन्हें अभी तक मदद नहीं मिली। वहीं, सैना परवीन नाम की महिला की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई और खबर है कि उन्हें उनकी नौकरी से भी निकाल दिया गया।
मुआवजा मिलने में देरी क्यों हो रही है?
दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक केवल 11 पीड़ितों को भुगतान मिला था। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के सूत्रों ने बताया कि बाकी आवेदकों के मामले में दिल्ली पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा गया है। पुलिस यह जांच कर रही है कि आवेदन करने वाले लोग वाकई पीड़ित हैं या उनका किसी आरोपी से कोई संबंध तो नहीं है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
रेड फोर्ट ब्लास्ट पीड़ितों के लिए सरकार ने कितनी राशि तय की थी?
मृतकों के परिवार के लिए 10 लाख, स्थायी विकलांगता के लिए 5 लाख, गंभीर घायलों के लिए 2 लाख और मामूली चोट वालों के लिए 20 हजार रुपये तय किए गए थे।
मुआवजा मिलने में देरी का मुख्य कारण क्या है?
दिल्ली पुलिस द्वारा आवेदकों के स्टेटस और आरोपियों से उनके संभावित संबंधों की जांच और स्पष्टीकरण लंबित होने के कारण भुगतान में देरी हो रही है।