Delhi और Rajasthan : उत्तर भारत में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब दिल्ली और राजस्थान को नॉर्थ इंडिया का ‘जामताड़ा’ कहा जा रहा है, जहाँ से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन फ्रॉड किए जा रहे हैं। सरकार की जागर
Delhi और Rajasthan : उत्तर भारत में साइबर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अब दिल्ली और राजस्थान को नॉर्थ इंडिया का ‘जामताड़ा’ कहा जा रहा है, जहाँ से बड़े पैमाने पर ऑनलाइन फ्रॉड किए जा रहे हैं। सरकार की जागरूकता मुहिम के बावजूद लाखों लोग अपनी गाढ़ी कमाई गंवा रहे हैं और पुलिस के पास शिकायतों का अंबार लगा हुआ है।
दिल्ली में साइबर ठगी का क्या हाल है?
NCRB की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में दिल्ली अपराध के मामले में 19 बड़े शहरों में सबसे ऊपर रही। यहाँ साइबर क्राइम की दर भले ही कुछ राज्यों से कम हो, लेकिन एक केस में होने वाला आर्थिक नुकसान बहुत ज्यादा है। आंकड़ों के मुताबिक, 2014 से जून 2025 के बीच दिल्ली के लोग ऑनलाइन फ्रॉड में 1450 करोड़ रुपये से ज्यादा गंवा चुके हैं। सिर्फ 2025 के पहले छह महीनों में ही 452 करोड़ रुपये की ठगी हुई है।
ठगों के नए तरीके और पुलिस की कार्रवाई
आजकल जालसाज IPO इन्वेस्टमेंट, डिजिटल अरेस्ट और फेक फॉरेक्स ट्रेडिंग जैसे नए तरीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने हाल ही में तीन बड़े नेटवर्क को पकड़ा है, जिन्होंने 1.22 करोड़ रुपये की ठगी की थी। इसके अलावा, पुलिस ने एक ऐसे मास्टरमाइंड को भी पकड़ा है जो APK फाइल भेजकर लोगों के बैंक खाते खाली कर रहा था। पुलिस अब उन बैंक अधिकारियों पर भी कार्रवाई कर रही है जो ठगों के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ खुलवाते हैं।
Rajasthan सरकार साइबर अपराध रोकने के लिए क्या करेगी?
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने साइबर क्राइम से लड़ने के लिए बड़ा प्लान बनाया है। साल 2030 तक प्रदेश के सभी जिलों में साइबर पुलिस स्टेशन खोले जाएंगे। साथ ही, 100 करोड़ रुपये की लागत से एक AI आधारित साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर और हेल्पलाइन कॉल सेंटर शुरू किया जाएगा। इसके लिए Rajasthan Cyber Crime Co-ordination Center (R4C) बनाया जा रहा है, जिसमें 275 एक्सपर्ट्स और एक IG रैंक का अधिकारी तैनात रहेगा।
| विवरण |
आंकड़े/जानकारी |
| दिल्ली में कुल नुकसान (2014-2025) |
₹1450 करोड़ से ज्यादा |
| 2025 (जनवरी-जून) का नुकसान |
₹452 करोड़ |
| राजस्थान का बजट (Cyber Center) |
₹100 करोड़ |
| मुख्य ठगी के तरीके |
Digital Arrest, Fake IPO, APK Files |
Frequently Asked Questions (FAQs)
डिजिटल अरेस्ट और APK फ्रॉड क्या होता है?
डिजिटल अरेस्ट में ठग CBI या ED अधिकारी बनकर डराते हैं और पैसे मांगते हैं। APK फ्रॉड में एक लिंक भेजकर मोबाइल में ऐप इंस्टॉल कराया जाता है, जिससे बैंक अकाउंट का एक्सेस ठगों के पास चला जाता है।
साइबर ठगी होने पर क्या करना चाहिए?
तुरंत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज करें और ‘Cyberdost’ के जरिए जारी गाइडलाइन्स का पालन करें।