Delhi में बारिश का पानी बचाने की तैयारी, DJB लगाएगा 500 नए हार्वेस्टिंग सिस्टम

Delhi: दिल्ली में मानसून के दौरान सड़कों पर होने वाले जलभराव और गर्मियों में पानी की भारी किल्लत एक बड़ी समस्या बन गई है। बारिश का लाखों लीटर पानी नालों में बह जाता है जबकि शहर के कई इलाके बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं

Delhi: दिल्ली में मानसून के दौरान सड़कों पर होने वाले जलभराव और गर्मियों में पानी की भारी किल्लत एक बड़ी समस्या बन गई है। बारिश का लाखों लीटर पानी नालों में बह जाता है जबकि शहर के कई इलाके बूंद-बूंद पानी के लिए तरसते हैं। इस स्थिति को सुधारने के लिए दिल्ली जल बोर्ड और सरकार अब वर्षा जल संचयन यानी Rainwater Harvesting पर जोर दे रही है।

दिल्ली जल बोर्ड ने मानसून से पहले भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। इसके तहत सरकारी इमारतों में 500 नए RWH सिस्टम लगाए जाएंगे और 1000 पुराने सिस्टम जो खराब हो चुके हैं, उन्हें फिर से चालू किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि 30 जून 2026 तक पहले चरण का काम पूरा कर लिया जाए। जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा है कि जल संरक्षण को एक जन आंदोलन बनाना होगा ताकि बारिश की हर बूंद को बचाया जा सके।

इस पूरी योजना से हर साल करीब 73 करोड़ लीटर पानी जमीन के अंदर वापस जा सकेगा। इसके अलावा, दिल्ली वेटलैंड अथॉरिटी ने 1,045 जल निकायों की पहचान की है, जिनमें से 631 को सुधारने का निर्देश दिया गया है। अप्रैल 2025 तक 256 जल निकायों का कायाकल्प पूरा हो चुका है।

शहर की जल निकासी व्यवस्था को सुधारने के लिए PWD ने नालों की सफाई का काम तेज किया है। कुल 125.87 किलोमीटर के नाला नेटवर्क में से 19.15 किलोमीटर की गाद निकाल दी गई है। हालांकि, इस गाद में मौजूद रसायनों और माइक्रोप्लास्टिक्स के सही निपटान को लेकर चिंता बनी हुई है।

दूसरी तरफ, शहर में पानी की किल्लत अब भी बरकरार है। दिल्ली को रोजाना करीब 1250 MGD पानी चाहिए, लेकिन आपूर्ति कम है। वसंत कुंज के कुछ इलाकों में अभी भी गंभीर पेयजल संकट है, जिसके लिए DDA ने टैंकर ठेकेदारों को नोटिस जारी किया है। यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से कुछ राहत मिली है, लेकिन पाइपलाइन लीकेज और दूषित पानी की समस्या अब भी लोगों को परेशान कर रही है।