Delhi के 44 पुराने फ्लाईओवरों की होगी जांच, PWD ने सुरक्षा के लिए मंजूर किए 11 करोड़ रुपये
Delhi: राजधानी दिल्ली में सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। सरकार ने शहर के 44 पुराने फ्लाईओवरों की सेहत जांच यानी स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का फैसला किया है। इसके लिए PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने 11 करोड़ रुपये की मंज
Delhi: राजधानी दिल्ली में सफर करने वालों के लिए एक बड़ी खबर है। सरकार ने शहर के 44 पुराने फ्लाईओवरों की सेहत जांच यानी स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने का फैसला किया है। इसके लिए PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने 11 करोड़ रुपये की मंजूरी दे दी है ताकि समय रहते किसी भी खतरे को टाला जा सके।
PWD मंत्री परवेश साहिब सिंह ने कहा कि जनता की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता और किसी हादसे का इंतजार करना सही नहीं है। दिल्ली की आबादी और ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है, इसलिए बुनियादी ढांचे का मजबूत होना बहुत जरूरी है। शहर के कई फ्लाईओवर 15 साल से ज्यादा पुराने हो चुके हैं और रोजाना लाखों लोग इनका इस्तेमाल करते हैं। अब वैज्ञानिक तरीके से इनकी जांच होगी ताकि पता चल सके कि कहां मरम्मत की जरूरत है।
सरकारी नियमों के मुताबिक फ्लाईओवरों की जांच हर पांच साल में होनी चाहिए। PWD अब पारदर्शी तरीके से टेंडर निकालकर एक्सपर्ट कंसल्टेंट्स को नियुक्त करेगा। यह पूरा काम साल 2026-27 और उसके बाद के सालों में अलग-अलग चरणों में पूरा किया जाएगा। अगले तीन सालों में हर साल सात से आठ फ्लाईओवरों की मरम्मत का लक्ष्य रखा गया है।
सबसे ज्यादा ध्यान उन फ्लाईओवरों पर दिया जाएगा जो 2000 साल से पहले बने थे। इनमें शादीपुर (1971), ज़खीरा (1970 के दशक) और आईपी एस्टेट के रिंग रोड फ्लाईओवर (1982) जैसे पुराने ढांचे शामिल हैं। इनके अलावा नरैना, मंगोलपुरी, लाजपत नगर-श्रीनिवासपुरी, सफदरजंग (AIIMS), सराय काले खान, अफ्रीका एवेन्यू, DND, गाजीपुर, अक्षरधाम, आईटीओ चुंगी अंडरपास, मां आनंदमयी मार्ग और एंड्रयूज गंज के फ्लाईओवरों की भी जांच होगी।
मरम्मत के लिए इस बार आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें इंजेक्शन ग्राउटिंग और एंटी-कोरोसिव ट्रीटमेंट जैसी नई विधियां अपनाई जाएंगी ताकि पुलों की उम्र बढ़ सके और वे सुरक्षित रहें।