Delhi: राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से जूझ रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली सरकार का Public Works Department (PWD) शहर के अलग-अलग हिस्सों में 18 नए फ्लाईओवर, अंडरपास और एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की तैयारी
Delhi: राजधानी दिल्ली में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से जूझ रहे लोगों के लिए अच्छी खबर है। दिल्ली सरकार का Public Works Department (PWD) शहर के अलग-अलग हिस्सों में 18 नए फ्लाईओवर, अंडरपास और एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की तैयारी कर रहा है। इस योजना का मुख्य मकसद शहर के 62 ट्रैफिक हॉटस्पॉट्स को ठीक करना है ताकि लोगों का सफर आसान हो सके और सड़कों पर गाड़ियों का इंतजार कम हो।
किन इलाकों में बनेंगे नए फ्लाईओवर और अंडरपास?
PWD ने शहर के उन रास्तों को चुना है जहां सबसे ज्यादा जाम लगता है। इस प्रोजेक्ट के तहत लगभग 150 किलोमीटर का रोड नेटवर्क तैयार किया जाएगा, जिसमें से 46 किलोमीटर सिर्फ फ्लाईओवर और अंडरपास के लिए होंगे। PWD मंत्री Parvesh Sahib Singh ने कहा है कि इन कामों से न केवल ट्रैफिक कम होगा, बल्कि सड़कों पर रुकने वाली गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण भी घटेगा।
| प्रमुख लोकेशन |
प्रस्तावित प्रोजेक्ट |
| ITO रेड लाइट और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन |
ट्रैफिक सुधार कार्य |
| Mehrauli-Mahipalpur Road |
फ्लाईओवर, अंडरपास और U-टर्न |
| Kanti Nagar ब्रिज से Telco T-point |
6 किमी लंबा फ्लाईओवर |
| Bawana Road |
फ्लाईओवर या एलिवेटेड कॉरिडोर |
| Kanjhawala Chowk से Mangolpuri |
10.7 किमी एलिवेटेड कॉरिडोर |
| Ring Road (Mahatma Gandhi Marg) |
55 किमी का सिस्टम सुधार |
| Najafgarh (Phirni Road) से NH-48 |
20 किमी लंबा कॉरिडोर |
काम कब तक शुरू होगा और क्या है प्रक्रिया?
फिलहाल PWD ने 156 किलोमीटर की सड़कों और चौराहों के लिए फिजिबिलिटी स्टडी शुरू कर दी है। इसके लिए एक्सपर्ट्स और कंसल्टेंट्स को नियुक्त किया गया है जो Detailed Project Reports (DPR) तैयार करेंगे। यह स्टडी अगले 4 से 5 महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। इसके बाद DUAC और UTTIPEC जैसी एजेंसियों से मंजूरी लेकर निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
रेलवे क्रॉसिंग और बजट का क्या है प्लान?
शहर के 8 से 10 रेलवे क्रॉसिंग पर भी ओवरब्रिज और अंडरपास बनाने की योजना है ताकि ट्रेन आने पर लगने वाले लंबे जाम से बचा जा सके। इस पूरे रोड अपग्रेड के लिए करीब 6.268 बिलियन रुपये का बजट रखा गया है, जिसमें दक्षिण दिल्ली का हिस्सा सबसे ज्यादा है। PWD ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि डिजाइन का काम समय सीमा के अंदर पूरा किया जाए।