Delhi में बदलने वाले हैं PUC नियम, कुछ गाड़ियों को 3 साल में एक बार करानी होगी जांच, 1 नवंबर से लागू होगा नया सिस्टम
Delhi: दिल्ली सरकार शहर की हवा को साफ करने के लिए प्रदूषण जांच यानी PUC के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इस नए सिस्टम के तहत अब सभी गाड़ियों के लिए एक जैसे नियम नहीं रहेंगे, बल्कि गाड़ी की उम्र और इंजन के हिसाब स
Delhi: दिल्ली सरकार शहर की हवा को साफ करने के लिए प्रदूषण जांच यानी PUC के नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इस नए सिस्टम के तहत अब सभी गाड़ियों के लिए एक जैसे नियम नहीं रहेंगे, बल्कि गाड़ी की उम्र और इंजन के हिसाब से जांच करानी होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इसे ‘प्रोएक्टिव विंटर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट फ्रेमवर्क’ का नाम दिया है, जिसे 1 नवंबर 2026 से लागू किया जाएगा।
नए नियमों के मुताबिक, 1 नवंबर 2026 से दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर केवल उन्हीं गाड़ियों को तेल मिलेगा जिनके पास वैध PUC सर्टिफिकेट होगा। सरकार का मानना है कि BS-VI गाड़ियां पुराने इंजन वाली गाड़ियों के मुकाबले काफी कम प्रदूषण फैलाती हैं, इसलिए उन्हें बार-बार जांच की झंझट से राहत दी जा रही है। वहीं, पुरानी गाड़ियों पर निगरानी और सख्त की जाएगी ताकि सर्दियों में प्रदूषण न बढ़े।
| वाहन का प्रकार | जांच की अवधि (PUC Frequency) |
|---|---|
| निजी BS-VI (6 साल तक पुराने) | हर 3 साल में एक बार |
| निजी BS-VI (6 से 10 साल पुराने) | हर साल एक बार |
| निजी BS-VI (10 साल से ज्यादा पुराने) | हर 6 महीने में एक बार |
| BS-IV वाहन (मार्च 2020 से पहले के) | हर 6 महीने में एक बार |
| BS-III और उससे पुराने वाहन | हर 3 महीने में एक बार |
| BS-VI कमर्शियल (6 साल तक पुराने) | हर 2 साल में एक बार |
| BS-VI कमर्शियल (6 साल से ज्यादा पुराने) | हर साल एक बार |
प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने अन्य कड़े कदम भी उठाए हैं। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर्ड गैर-BS-VI कमर्शियल गाड़ियों के दिल्ली में घुसने पर रोक रहेगी, हालांकि CNG और इलेक्ट्रिक गाड़ियों को इससे छूट मिलेगी। साथ ही, इसी दौरान अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग फीस दोगुनी कर दी जाएगी।
शहर में धूल रोकने के लिए निर्माण कार्यों पर भी सख्ती रहेगी। 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल नियंत्रण नियमों का पालन करना होगा और बड़े साइट्स पर एंटी-स्मॉग गन लगाना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर सरकारी और प्राइवेट ऑफिसों में कर्मचारियों की हाजिरी 50% की जा सकती है और बाकी लोगों को घर से काम करने को कहा जा सकता है। खुले में कचरा जलाने वालों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।