Delhi के जंतर-मंतर पर इथेनॉल ब्लेंडिंग के खिलाफ प्रदर्शन आज, नितिन गडकरी के घर के बाहर धरने की चेतावनी

Delhi: पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की सरकारी नीति के खिलाफ आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। ‘टीम भारत अगेंस्ट इथेनॉल स्कैम’ के बैनर तले लोग दोपहर 2 बजे इकट्ठा होंगे। प्रदर्शनकारियों का क

Delhi: पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की सरकारी नीति के खिलाफ आज दिल्ली के जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध-प्रदर्शन हो रहा है। ‘टीम भारत अगेंस्ट इथेनॉल स्कैम’ के बैनर तले लोग दोपहर 2 बजे इकट्ठा होंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अगर उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने से रोका गया, तो वे केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के आवास के सामने धरना देंगे।

इस प्रदर्शन का नेतृत्व उद्यमी और राजनीतिक विश्लेषक तहसीन पूनावाला कर रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के लिए मौखिक अनुमति तो दी है, लेकिन भीड़ को 200 लोगों तक सीमित रखने को कहा है। पूनावाला ने साफ किया है कि प्रतिबंधों के बावजूद यह प्रदर्शन होगा। प्रदर्शनकारियों की मुख्य चिंता पेट्रोल में 20% इथेनॉल (E20) के अनिवार्य उपयोग को लेकर है। उनका दावा है कि इससे गाड़ियों के माइलेज और इंजन की परफॉर्मेंस पर बुरा असर पड़ता है। खासकर 2023 से पहले बनी गाड़ियों के लिए यह ईंधन नुकसानदेह हो सकता है, और भारत में लगभग 90% वाहन इसी श्रेणी में आते हैं।

दूसरी तरफ, सरकार इस प्रोग्राम को राष्ट्रीय स्तर पर लागू कर रही है। मई 2026 में सरकार ने 30% तक इथेनॉल मिश्रण (E-22 से E-30) के नए मानक जारी किए थे और जून 2026 में 22% से 30% मिश्रण वाले पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क (excise duty) भी खत्म कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भी 30 जून 2026 को 20% इथेनॉल मिश्रण की नीति को जारी रखने की बात कही है।

इस विवाद पर मंत्रियों ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 3 जुलाई 2026 को इसे इथेनॉल के खिलाफ एक ‘पेड कैंपेन’ बताया। वहीं, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 4 जुलाई को सोशल मीडिया पर फैली अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि E20 से इंजन खराब नहीं होते। उन्होंने माना कि माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन की खटखटाहट कम होती है और त्वरण (acceleration) बेहतर होता है।

सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस मामले पर 10 बिंदुओं वाला एक स्पष्टीकरण जारी किया है। मंत्रालय ने कहा कि यह कार्यक्रम वैज्ञानिक शोध और अंतरराष्ट्रीय अनुभवों पर आधारित है। उन्होंने इंजन डैमेज, पानी की अत्यधिक खपत और वारंटी रद्द होने जैसे दावों को गलत बताया है। ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के परीक्षणों में भी इंजन पर कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया है।