Delhi : देश की राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर अब ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की चर्चा तेज हो गई है। बीजेपी सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने इस संबंध में केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। उनका मानना
Delhi : देश की राजधानी दिल्ली का नाम बदलकर अब ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की चर्चा तेज हो गई है। बीजेपी सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने इस संबंध में केंद्र सरकार और गृह मंत्री अमित शाह को औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। उनका मानना है कि ऐसा करने से शहर को उसकी प्राचीन सभ्यता और ऐतिहासिक पहचान वापस मिलेगी।
नाम बदलने की मांग और मुख्य प्रस्ताव क्या हैं?
बीजेपी सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने 25 फरवरी 2026 को गृह मंत्री अमित शाह को दोबारा पत्र लिखकर दिल्ली को इंद्रप्रस्थ करने की मांग की। इस प्रस्ताव में केवल शहर का नाम ही नहीं, बल्कि कुछ बड़े लैंडमार्क्स के नाम बदलने की बात भी कही गई है:
- Old Delhi Railway Station का नाम ‘इंद्रप्रस्थ जंक्शन’ किया जाए।
- Indira Gandhi International Airport का नाम ‘इंद्रप्रस्थ एयरपोर्ट’ रखा जाए।
- शहर में पांडवों की मूर्तियां लगाई जाएं।
इसके अलावा, वजीरपुर से बीजेपी विधायक पूनम शर्मा ने भी दिल्ली विधानसभा में इलाहाबाद से प्रयागराज बनने का उदाहरण देते हुए इस मांग का समर्थन किया है।
इस फैसले के पीछे क्या तर्क और आधार हैं?
समर्थकों का कहना है कि इंद्रप्रस्थ नाम महाभारत काल से जुड़ा है और इससे लोग अपनी जड़ों से जुड़ेंगे। पुराने किले में हुई खुदाई में 1000 ईसा पूर्व के बर्तनों (Painted Grey Ware) के सबूत मिले हैं, जिसे प्राचीन बस्ती का प्रमाण माना जा रहा है। वहीं, विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भी अक्टूबर 2025 में इस बदलाव की मांग की थी।
क्या कहते हैं इतिहासकार और क्या है सरकारी नियम?
इतिहासकारों की राय इस पर बंटी हुई है। कुछ लोग इसे सांस्कृतिक रूप से सही मानते हैं, जबकि प्रोफेसर आर. महालक्ष्मी और सलिल मिश्रा जैसे विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली का इतिहास कई परतों में बसा है, जिसमें मुगल और ब्रिटिश दौर भी शामिल है। उनके अनुसार, केवल एक पौराणिक नाम शहर के पूरे विकास को नहीं दिखा सकता।
नियमों की बात करें तो दिल्ली एक केंद्र शासित प्रदेश है, इसलिए नाम बदलने का अंतिम फैसला केंद्र सरकार का होगा। प्रक्रिया के तहत विधानसभा से प्रस्ताव उपराज्यपाल (LG) के पास जाता है और फिर गृह मंत्रालय (MHA) इसकी प्रशासनिक जांच करता है।